1. Hindi News
  2. विदेश
  3. यूरोप
  4. ट्रंप से डीजल की डील के बाद रूस ने बोला बड़ा हवाई हमला, यूक्रेन बोला- मार डाले हमारे 20 लोग

ट्रंप से डीजल की डील के बाद रूस ने बोला बड़ा हवाई हमला, यूक्रेन बोला- मार डाले हमारे 20 लोग

डोनाल्ड ट्रंप से डीजल की डील के बाद रूस ने यूक्रेन पर बड़ा अटैक किया है। यह यूक्रेनी हमले का जवाब बताया जा रहा है। इस बीच, यूक्रेन ने बताया कि रूसी हमले में उनके 20 लोगों की जान चली गई है।

Russian Strikes in Ukraine- India TV Hindi
Image Source : AP यूक्रेन में कई रिहायशी इमारतों को भी बनाया गया निशाना।

ट्रंप से पुतिन ने बड़ी डील कर ली है। पुतिन 30 लाख टन डीजल अमेरिका भेजेंगे। रूस से 3 लाख टन डीजल एक-दो दिन में अमेरिका पहुंच जाएगा। इसपर जेलेंस्की ने ट्रंप को धोखेबाज बताकर डील का विरोध किया है। डील के बाद जेलेंस्की ने रूसी रिफाइनरी और तेल लोड करने वाले टर्मिनल पर हमले बढ़ा दिए हैं। रूस की तीन रिफाइनरी पर लॉन्ग रेंज ड्रोन से हमले किए है। फिर, रूस ने तगड़ा पलटवार किया। यूक्रेन के कई प्रांतों में बड़े मिसाइल और ड्रोन हमले कर भयंकर तबाही मचाई है। यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया है कि रूस के हमलों में Zaporizhzhia रीजन में करीब 20 लोगों की मौत हो गई है। इस दौरान, 18 लोग घायल भी गए हैं। रूस ने एक और बड़ा खुलासा EU देशों पर किया है। सैंक्शन्स के बावजूद EU देशों ने 2025 से ज्यादा LNG 2026 में खरीदी है। जेलेंस्की को अब समझ नहीं आ रहा क्या करें, युद्ध आगे बढ़ाएं या मॉस्को जाकर पुतिन से डील कर लें।

ट्रंप ने एक बार फिर अपने वादे से मारी पलटी

ट्रंप एक बार फिर अपने वादे से पलटी मार गए। 16 सितंबर को ट्रंप सरकार ने लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग एक्ट 2026 पास किया था। 24 दिन में ट्रंप वादे से पलट गए। खुद रूसी तेल खरीदने का ऐलान कर दिया। जेलेंस्की को बीच युद्ध में ट्रंप ने कहीं का नहीं छोड़ा। ट्रंप रूस से डीजल डील कर पुतिन का ATM बन गए। इस डील से नाराज जेलेंस्की ने रूसी रिफाइनरीज पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। उन रूसी टर्मिनल पर बमबारी कर दी जहां से रूसी तेल अमेरिका को लोड हो रहा है।

ट्रंप-पुतिन की डील से सन्न रह गया यूरोप

हालांकि, ट्रंप-पुतिन की डीजल डील से पूरा यूरोप सन्न रह गया है। अमेरिका और नाटो देशों के बीच दरार पड़ने का डर पैदा हो गया है। ट्रंप ने अपने फायदे के लिए यूक्रेन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, फिनलैंड, पोलैंड जैसे देशों को अंधेरे में रखा। उन पर अपने तेल रिजर्व से ज्यादा से ज्यादा डीजल रिलीज करने का दबाव बनाते रहे। रूस से सस्ता डीजल-तेल और गैस नहीं खरीदने की बातें करते रहे। उन्हें महंगाई के दलदल में फंसा कर खुद रूस से डील कर ली।

7 महीने के लिए हुई रूस-अमेरिका की डील

रूस अमेरिका की डीजल डील सात महीने के लिए हुई है। ट्रंप सरकार ने रूसी डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा ली है। अमेरिका अक्टूबर में रूस से 3 लाख टन डीजल खरीदेगा। नबंवर में खरीद बढ़ाकर 5 लाख टन कर देगा। फिर, दिसंबर में 10 लाख टन डीजल की खरीद कर सकता है। अगले साल अप्रैल तक करीब 30 लाख टन डीजल अमेरिका खरीद सकता है।

मिड टर्म इलेक्शन में फजीहत से बचना चाहते हैं ट्रंप!

दरअसल, अमेरिका में ईरान युद्ध से पहले डीजल की कीमत 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी। अब डीजल के दाम बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन हो गए हैं। अमेरिका में किसान, ट्रक ड्राइवर, कमर्शियल व्हीकल चलाने वाले, तमाम बड़ी कंपनियां डीजल का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में अगर पुतिन की मदद से ट्रंप डीजल के दाम घटा पाए तो मिड टर्म चुनाव में फजीहत से बच सकते हैं।

ये भी पढ़ें- भारत ने चला ऐसा दांव कि रूस हुआ खुश, क्रेमलिन ने 'भारतीय मित्रों' को लेकर कह दी बड़ी बात

Latest World News