लंदन: बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं का मामला गरमाया हुआ है। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं के खिलाफ लंदन में भी प्रदर्शन हुआ है। लंदन में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर भारतीय और बांग्लादेशी हिंदू समुदायों ने विरोध प्रदर्शन किया है।
बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बना रहे कट्टरपंथी
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की हालत खराब है। यहां कट्टरपंथी ताकतें उन पर ईशनिंदा के झूठे आरोप लगाकर उन पर हमला कर रही हैं। हालही में हुई दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या इसकी जीता जागता उदाहरण है।
खुद ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि निराधार आरोप लगाकर अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करना, उनकी संपत्ति हड़पना और उन्हें मारना कट्टरपंथियों का प्रमुख हथियार है।
दीपू दास के साथ क्या हुआ था?
दीपू दास नाम के एक हिंदू युवक की बीते 18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। दीपू महज 27 साल का था और गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। जब इतने से भी भीड़ को शांति नहीं मिली तो भीड़ ने उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया। इस घटना की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है और कट्टरपंथी ताकतें हर तरफ निंदा का विषय बन रही हैं।
इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन सवाल अब भी वही है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के प्रति इतनी नफरत क्यों है कि उन पर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं।
भारत में भी प्रदर्शन
दीपू दास की हत्या के बाद भारत में भी प्रदर्शन हुए और दीपू दास को न्याय देने की मांग उठी है। यही नहीं, सोशल मीडिया पर दुनियाभर के देशों में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने इस घटना पर अपना विरोध जताया है।
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