बिहार सरकार से तीन डिसमिल जमीन की मांग से संबंधित आवेदन को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर हजारों महिलाओं की कतार लगी हुई है, अलग-अलग जिले से आई महिलाएं कतार में खड़ी है, करीब 1 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है। महिलाओं ने कहा गांव में यह खबर फैली और उसके बाद हम लोग यहां आए हैं, किसी ने कहा मुखिया ने कहा, किसी ने कहा कानो कान खबर मिली। चलिए जानते हैं पूरा मामला।
बिहार सरकार का अभियान बसेरा-2 योजना
दरअसल बिहार सरकार की अभियान बसेरा-2 योजना के तहत भूमिहीन गरीबों को तीन डिसमिल जमीन दिए जाने की घोषणा के बाद, आवेदन जमा करने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर हजारों महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी है। सचिवालय के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, जिससे पुलिस को भी व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। भीड़ के पीछे फॉर्म जमा करने की जल्दी और कई तरह की चर्चाएं व अफवाहें भी शामिल हैं, जिसके कारण लोग बड़ी संख्या में सचिवालय पहुंच रहे हैं।
हाल ही में भूमि एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने घोषणा की है कि सरकार के कार्यकाल का एक साल पूरा होने के मौके पर 30 हजार और भूमिहीन परिवारों को जमीन का बंदोबस्ती प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इससे पहले भी 15 अगस्त को 30 हजार लोगों को पहले जमीन दिया गया था।
CM सचिवालय के बाहर लगभग 1 किलोमीटर लंबी लाइन लग गई है। इसमें बक्सर, भोजपुर, गया और नालंदा, औरंगाबाद समेत बिहार के अलग-अलग जिलों से आई बेहद गरीब महिलाएं शामिल हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग सिर्फ एक अफवाह या अधूरी जानकारी के आधार पर सीधे पटना पहुंच गए हैं। वहां हाथों-हाथ जमीन का फॉर्म जमा हो रहा है या जमीन मिल रही है। जबकि नियमों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया होनी है। सरकारी नियमों के मुताबिक, अभियान बसेरा-2 के तहत पात्र लाभार्थियों की पहचान, वेरिफिकेशन और आवेदन की प्रक्रिया स्थानीय अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन के स्तर पर की जानी है, न कि सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय में। लेकिन चूंकि लोगों के आवेदन यहां लिए जा रहे हैं तो भीड़ और बढ़ती ही जा रही है।
आधिकारिक अभियान बसेरा पोर्टल के अनुसार, जमीन का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो इन शर्तों को पूरा करते हैं।
मूल निवासी: आवेदक अनिवार्य रूप से बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
पूर्णतः भूमिहीन: परिवार ग्रामीण क्षेत्र का होना चाहिए और उसके पास रहने या गृह-निर्माण के लिए अपनी कोई भी भूमि नहीं होनी चाहिए।
पूर्व लाभ से वंचित: परिवार को पहले किसी भी सरकारी योजना (जैसे पूर्व के भूमि आवंटन कार्यक्रम) के तहत जमीन न मिली हो।
जमीन का आकार: प्रत्येक पात्र परिवार को घर बनाने के लिए कम से कम 3 डिसमिल जमीन (लगभग 1,306.8 वर्ग फीट) दी जाएगी।
जमीन न होने पर ₹1 लाख की सहायता: नियम के अनुसार, यदि किसी अंचल में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होती है, तो सरकार उस परिवार को निजी जमीन खरीदने या घर के इंतजाम के लिए ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देगी।
आवास योजना से जुड़ाव: इस योजना का मुख्य उद्देश्य भूमिहीनों को जमीन देकर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाना है, क्योंकि बिना जमीन के आवास योजना का फंड जारी नहीं हो पाता।