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बिहार दारोगा परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, बायोमेट्रिक कर्मी ही निकलें गैंग के मास्टरमाइंड, पुलिस ने धर दबोचा

बेगूसराय के एस.के.महिला कॉलेज परीक्षा केंद्र पर परीक्षा माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त की गई बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी ही इस धांधली के मुख्य सूत्रधार निकले।

बिहार दारोगा परीक्षा फर्जीवाड़ा- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV बिहार दारोगा परीक्षा फर्जीवाड़ा

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की मद्य निषेध सब-इंस्पेक्टर परीक्षा के दौरान बेगूसराय के एस.के.महिला कॉलेज केंद्र पर एक बड़े परीक्षा माफिया नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। हैरान वाली बात यह है कि परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिस बायोमेट्रिक कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी, उसी के कर्मचारी इस धांधली के मास्टरमाइंड निकले। आरोपी फर्जी आधार कार्ड के जरिए परीक्षा केंद्र में दाखिल हुए थे और उनके पास से मोबाइल और टैबलेट बरामद किए गए हैं। कॉलेज प्रशासन की मुस्तैदी के बाद बेगूसराय पुलिस ने फर्जी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुट गई है।

परीक्षा माफिया नेटवर्क का हुआ पर्दाफाश

मिली जानकारी के अनुसार 12 मई को परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करने वाले दो कर्मियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई। शक होने पर जब कॉलेज प्रशासन और पुलिस टीम ने दोनों युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो परत- दर-परत इस साजिश का खुलासा हुआ।

फर्जी नाम और आधार कार्ड के सहारे परीक्षा केंद्र में घुसे थे आरोपी

शुरुआती पूछताछ में युवकों ने अपनी पहचान मणि कुमार (पिता- संजय यादव, घर- वीरपुर, बेगूसराय) और दिलखुश कुमार (पिता- बबलू राय, घर- सुजानपुर, बेगूसराय) बताया था। उन्होंने खुद को साइनोसौर कंपनी का सीटीओ हेड और ऑपरेटर बताया। लेकिन पुलिस में जब कड़ाई से पूछताछ की तो मणि कुमार का असली नाम अजय कुमार (पिता- मनोहर यादव, घर- इतहरी, जिला- सहरसा) और दिलखुश कुमार का असली नाम आशीष कुमार (पिता- ओमप्रकाश साह, घर- रहीमपुर, जिला- खगड़िया) निकला। दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें यह फर्जी आधार कार्ड सौरव नाम के एक व्यक्ति ने परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने के लिए बनाकर दिए थे।‌

मोबाइल-टैब में व्हाट्सएप पर मिले प्रश्नपत्र और उत्तरों के फोटो-वीडियो

कॉलेज के  प्राचार्य डॉ. विमल कुमार ने बताया कि जब कॉलेज कर्मियों ने आरोपियों का मोबाइल और टैब चेक किया, तो उसमें व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्रों और जवाब की फोटो और वीडियो का आदान-प्रदान पाया गया। आरोपी सौरव आनंद और मिथुन नाम के व्यक्तियों के साथ लगातार संपर्क में थे। जैसे ही कॉलेज प्रशासन ने आरोपियों को पकड़ा, उन्होंने व्हाट्सएप कॉल के जरिए दूसरे जगह पर बैठे अपने साथियों को सचेत कर दिया, जिसके तुरंत बाद मुख्य सर्वर और चैट से सारा डेटा डिलीट कर दिया गया।

डीएसपी बोले- सेटिंग के जरिए कराते थे परीक्षा में फर्जीवाड़ा

सदर डीएसपी आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि एस.के.महिला कॉलेज में कुछ गड़बड़ी होने की सूचना मिली थी। जिसके बाद पुलिस की टीम वहां पहुंची तो बायोमेट्रिक कंपनी के सुपरवाइजर और ऑपरेटर को एक्स्ट्रा मोबाइल और टैब के साथ पकड़ा गया। इसमें और भी लोगों की संलिप्तता पाई गई है। अलग-अलग जगह से इन लोगों को परीक्षा केंद्र पर सेटिंग करने का ऑफर आता था। परीक्षा में धांधली करवाने के लिए यह लोग एक्स्ट्रा मोबाइल और टैब लेकर आते थे और उसके ज़रिए आंसर बताया जाता था। बता दें, अभी कुछ दिन पहले मुजफ्फरपुर में नीट परीक्षा का फर्जी प्रश्न पत्र बेचकर ठगी करने वाले टेलीग्राम गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था

(बेगूसराय से संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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