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''3 महीने पहले बनी थी झीरम घाटी हमले की योजना'', कोर्ट के आदेश में नक्सली साजिश की खौफनाक जानकारियों का जिक्र

एनआईए की जांच में सामने आया है कि माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में 2013 के घातक झीरम घाटी हमले की योजना करीब तीन महीने पहले ही बना ली थी और उन्होंने सुकमा-जगदलपुर राजमार्ग की रेकी की, घात लगाने के लिए जगह तय की और हमले से कुछ दिन पहले इसका अभ्यास भी किया था।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : ANI सांकेतिक तस्वीर

रायपुरः नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच से पता चला है कि माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में 2013 में हुए जानलेवा झीरम घाटी हमले की योजना लगभग तीन महीने पहले ही बना ली थी। उन्होंने सुकमा-जगदलपुर हाईवे का सर्वे किया, घात लगाकर हमला करने की जगह चुनी और हमला करने से कुछ दिन पहले रिहर्सल भी की। 25 मई, 2013 के इस हमले की जांच से जुड़ी जानकारी जगदलपुर की एक स्पेशल NIA कोर्ट के आदेश में दी गई है। कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में 10 आरोपियों को मौत की सज़ा सुनाई। यह आदेश शुक्रवार को अपलोड किया गया।

कांग्रेस के कई नेताओं की हुई थी मौत

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि सबूतों से साफ पता चलता है कि यह हमला पहले से सोची-समझी साज़िश के तहत और जानबूझकर किया गया था। कोर्ट के सामने रखी गई गंभीर और राहत देने वाली परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) श्रेणी में रखा गया है। सुकमा से जगदलपुर जा रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए इस हमले में कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हो गई थी।

मारे गए लोगों में तत्कालीन राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। जांच में पता चला कि माओवादियों ने उस साल 16 से 25 फरवरी के बीच 'साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड' की बैठक में हमले की योजना बनाई थी और इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई थी। मौत की सज़ा पाने वालों में प्रमिला मोदियाम (25), चैतू लेकम (25), सुमित्रा पुनेम उर्फ ​​आयती मोदियाम (40), मुक्का मंडावी (40), कवासी कोसा उर्फ ​​कोसराम (30), आयता मडकम (35), मडकामी देवा (35), जोगा मडकामी (35), बंजामी सन्ना (35) और महादेव नाग (28) शामिल हैं।

 गाड़ियों पर मिले थे 206 गोलियों के निशान 

कोर्ट के आदेश के अनुसार, NIA की जांच में पाया गया कि दरभा डिविजनल कमेटी के तत्कालीन सदस्य देवा को इस ऑपरेशन को अंजाम देना था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस जगह के ऊपर पहाड़ी पर मौजूद एक ठिकाने से फायरिंग की गई और पीड़ितों को बहुत पास से गोली मारी गई। गाड़ियों पर 206 गोलियों के निशान मिले। सबूतों से पता चला कि माओवादी खास तौर पर सलवा जुडूम नेता महेंद्र कर्मा, कांग्रेस नेता नंद कुमार पटेल और उनके परिवार वालों को ढूंढ रहे थे। कर्मा ने घटना स्थल पर अपनी पहचान बताई और हमलावरों से बेगुनाह लोगों को न मारने की गुजारिश की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बहुत पास से गोली मारी गई और पत्थरों से उनका चेहरा कुचल दिया गया।

पोस्टमार्टम में 69 घाव पाए गए

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि माओवादियों ने उनके शव पर चाकू से कई घाव किए। पोस्टमार्टम में 69 घाव पाए गए। आदेश में कहा गया है कि NIA को पता चला कि छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन का ढांचा 'दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी' के तहत काम करता था, जबकि झीरम घाटी का इलाका साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड की दरभा डिविजनल कमेटी के अधिकार क्षेत्र में आता था। तैयारियों के तहत, कांगेर घाटी लोकल कमेटी के सदस्यों - जिनमें सोनाधर, सुमित्रा, महादेव नाग और मुक्का मंडावी (ये तीनों दोषी ठहराए जा चुके हैं) ने जन मिलिशिया सदस्यों, संघम सदस्यों और अन्य सहयोगियों के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों में झीरम घाटी आने वाले कैडर के लिए खाने, रहने और लॉजिस्टिक्स का इंतज़ाम करने पर ध्यान दिया गया। 

हमले से पहले नक्सलियों ने किया था सर्वे

आदेश में यह भी कहा गया है कि माओवादियों ने सुकमा-जगदलपुर हाईवे का सर्वे किया, एक सही जगह चुनी और घटना से छह-सात दिन पहले देवा और विनोद जैसे नेताओं की अगुवाई में एक्कम-चकपाल के पास जंगल में रिहर्सल की। NIA ने बताया कि 22 और 23 मई की रात को, AK-सीरीज़ की राइफल, SLR, LMG, .303 राइफल, ग्रेनेड और देसी हथियारों से लैस करीब 100 माओवादियों और कांगेर घाटी के जन मिलिशिया सदस्यों ने सड़क के दोनों तरफ़ अस्थायी कमांड सेंटर बनाए। माओवादियों को पता था कि सलवा जुडूम (माओवाद-विरोधी अभियान) के प्रमुख नेता कर्मा जैसे कांग्रेस नेता 'परिवर्तन यात्रा' का हिस्सा होंगे।

25 मई को शाम करीब 4 बजे, जब कांग्रेस का काफिला टोंगपाल से गुज़रकर झीरम घाटी से 13 किलोमीटर आगे पहुंचा, तो एक धमाका हुआ और माओवादियों ने दोनों तरफ़ से गोलीबारी शुरू कर दी। NIA की जांच में पता चला कि इस हमले में 150-200 माओवादी कैडर (पुरुष और महिलाएं) शामिल थे। हमले के दौरान नौ AK-47 राइफ़ल, सात INSAS राइफ़ल, चार 9-mm पिस्तौल और दो SLR भी लूट ली गईं।

इनपुट- पीटीआई

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