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छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने तारा कोल ब्लॉक पर मुख्यमंत्री साय को दी बहस की चुनौती, बोले- 'सब पता चल जाएगा'

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Sep 17, 2026 04:57 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 05:12 pm IST

कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने तारा माइंस को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बहस की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने दोनों नेता बहस कर लेते हैं, सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल- India TV Hindi
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल Image Source : REPORTER

अंबिकापुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहस के लिए चुनौती दी है। अंबिकापुर में कोयला खदानों की स्वीकृति को लेकर सीएम साय मुझसे डिबेट कर लें। सब पता चल जाएगा किसने माइंस के लिए स्वीकृति दी थी। बघेल ने कहा कि मीडिया के सामने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री आपस में बहस कर लेते हैं। मैं सीएम साय को बहस के लिए चैलेंज देता हूं। मुख्यमंत्री को कोल माइंस को लेकर हमसे बहस कर लें। 

तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सरकार पर हमलावर हैं बघेल

इससे पहले कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने मंगलवार को कहा था कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार को केंद्र से हसदेव-अरंड इलाके में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी रद्द करने के लिए कहना चाहिए, क्योंकि इससे जंगलों और आदिवासी समुदायों पर बुरा असर पड़ेगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के अनुरोध पर केंद्र ने 2023 में नीलामी प्रक्रिया से तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को बाहर कर दिया था।

उन्होंने दावा किया कि विष्णु देव साय सरकार ने 11 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर इस ब्लॉक की नीलामी की सिफारिश की। बघेल ने कहा, "राज्य सरकार को लोगों को बताना चाहिए कि किसके कहने पर और किस आधार पर उसने केंद्र को पत्र लिखा... उसे लोगों से माफी मांगनी चाहिए और केंद्र से नीलामी रद्द करने का अनुरोध करना चाहिए।"

5,000 एकड़ में तारा ब्लॉक

बघेल ने दावा किया कि तारा ब्लॉक लगभग 5,000 एकड़ में फैला है, जिसमें से 4,000 एकड़ से ज़्यादा हिस्से में घने जंगल हैं। बघेल ने कहा, "हसदेव और बांगो बांध इस इलाके की जीवन रेखा हैं। अगर यहां माइनिंग होती है, तो लाखों पेड़ काटे जाएंगे और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लेमरू एलिफेंट रिजर्व के लिए लगभग 1,950 वर्ग किलोमीटर वन भूमि को संरक्षित किया था। उन्होंने दावा किया कि माइनिंग से हाथियों के कॉरिडोर पर असर पड़ सकता है और वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, "बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद, छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और ज़मीन को अडानी ग्रुप को सौंपा जा रहा है।"

रिपोर्ट- सिकंदर खान

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