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छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, झीरम घाटी हमले के सभी 10 दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Sep 16, 2026 05:43 pm IST,  Updated : Sep 16, 2026 06:50 pm IST

छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई है; इस हमले में 29 लोग मारे गए थे।

एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला- India TV Hindi
एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला

Highlights

  • क्या है झीरम घाटी अटैक केस
  • कितने लोगों की हुई थी मौत
  • कितने साल चला केस

छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई है; इस हमले में 29 लोग मारे गए थे। जगदलपुर की एक NIA कोर्ट ने शनिवार को हमले के  गिरफ़्तार सभी 10 लोगों को दोषी ठहराया था। बता दें कि इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्या चरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 29 लोग मारे गए थे। बस्तर की झीरम घाटी में 25 मई, 2013 को हुए हमले ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लगभग पूरे शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया था। इस मामले में करीब 13 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी माना था। दोषियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे।

किन धाराओं में सुनाया फैसला
कोर्ट ने सभी आरोपियों को IPC की धाराओं 147, 148, 149, 121, 121(A), 122, 341, 302, 307, 396, 397, 427 और 120(B); आर्म्स एक्ट की धाराओं 25 और 27; विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं 3, 4 और 5; और UA (P) एक्ट की धाराओं 16, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत दोषी पाया।

ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था
इससे पहले, 5 सितंबर 2026 को ट्रायल कोर्ट ने 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया था और उन्हें UA (P) एक्ट, IPC, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना था, लेकिन सज़ा की मात्रा तय करने का फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले के दरभा में झीरम घाटी में NH-221 पर INC पार्टी की "परिवर्तन यात्रा" के काफ़िले पर प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के हथियारबंद कैडरों द्वारा किए गए सुनियोजित हमले से जुड़ा है।

क्या था झीरम घाटी केस
यह मामला IED विस्फोट, अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड विस्फोट से जुड़ा है, जिसमें 24 निर्दोष नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 35 से ज़्यादा नागरिक और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे; घायलों में से 3 की बाद में मौत हो गई। CPI (माओवादी) के कैडरों ने मृतकों और पीड़ितों से हथियार और गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, मोबाइल फ़ोन और अन्य सामान भी लूट लिया था।

एनआईए की जांच में हुआ था खुलासा
NIA ने कुल 39 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ क्रमशः 25 सितंबर 2014 और 28 सितंबर 2015 को चार्जशीट (9 अभियुक्त) और सप्लीमेंट्री चार्जशीट (30 अभियुक्त) दाखिल की थी। चार्जशीट में नामजद 10 आरोपियों के खिलाफ शुरुआती ट्रायल, अभियोजन पक्ष के 101 गवाहों के बयान दर्ज होने के साथ पूरा हुआ। गिरफ्तार और चार्जशीटेड आरोपियों में से एक की न्यायिक हिरासत में मौत हो गई।

NIA की जांच से पता चला कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन CPI (माओवादी) के हथियारबंद कैडर, स्थानीय कमेटियों/डिविजनों की मिलीभगत से, अपने 'टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन' (TCOC) के तहत "परिवर्तन यात्रा" के काफिले में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और उनकी हत्या करने की आपराधिक साजिश का हिस्सा थे।

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