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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार, पेपर लीक केस में ED का शिकंजा

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Jul 25, 2026 06:37 pm IST,  Updated : Jul 25, 2026 06:41 pm IST

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। उनपर आरोप है कि 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में पेपर लीक कर अवैध लाभ लिया गया और रिश्तेदारों व रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया।

enforcement directorate- India TV Hindi
प्रवर्तन निदेशालय Image Source : PTI

रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को पूछताछ के बाद सोनवानी को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के बाद सोनवानी को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने दावा किया कि पूछताछ के दौरान सोनवानी के जवाब ''टालमटोल वाले'' रहे। 

सीबीआई की FIR के आधर पर ईडी ने शुरू की थी जांच

यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोगकी ओर से वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने राज्य पुलिस की ओर से कराई गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। यह मामला नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को हराकर भाजपा के सत्ता में आने के बाद दर्ज किया गया था। सोनवानी को 2024 में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

चयन प्रक्रिया में हेरफेर कर लाभ पहुंचाने का आरोप

ईडी का आरोप है कि सोनवानी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराकर अवैध आर्थिक लाभ लिया और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए अपने रिश्तेदारों तथा रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया।   एजेंसी का आरोप है कि इसमें उनके अपने रिश्तेदारों और रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया। केंद्रीय एजेंसी ने दावा किया कि वर्ष 2021 में लोक सेवा आयोग के भर्ती नियमों में संशोधन करके परिवार की परिभाषा से ''भतीजा या भांजा'' शब्द हटा दिया गया था।जांच एजेंसी का दावा है कि इस बदलाव से कथित तौर पर सोनवानी के रिश्तेदारों के सरकारी पदों पर चयन का रास्ता आसान हुआ।

ईडी के अनुसार, जांच में पता चला कि रिश्वत की रकम का एक हिस्सा कैश लिया गया और दूसरा हिस्सा परिवार के नियंत्रण वाली एक समिति के माध्यम से एक ''अस्तित्वहीन'' कॉलेज के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) दान के नाम पर किया गया। ईडी का आरोप है कि दो डिप्टी कलेक्टर के चयन में फायदा पहुंचाने के बदले एक प्राइवेट कंपनी से करीब 45 लाख रुपये इस माध्यम से लिये गए। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया जा रहा है, जहां ED उनकी हिरासत की मांग करेगी। 

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