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दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मेडिकल मशीनें बेकार, कहीं स्टाफ नहीं तो कहीं मशीनें खराब

दिल्ली हाईकोर्ट के 3 जुलाई 2026 के आदेश के बाद अस्पतालों द्वारा दाखिल की गई ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि कई प्रमुख अस्पतालों में करोड़ों रुपये की महंगी मशीनें और उपकरण बिना इस्तेमाल के बेकार पड़े हैं।

 सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के मेडिकल उपकरण बेकार- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV/ REPRESENTATIVE PIC सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के मेडिकल उपकरण बेकार

दिल्ली हाईकोर्ट के सामने दाखिल सरकारी अस्पतालों की रिपोर्टों से मेडिकल मशीनों के इस्तेमाल को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। हाईकोर्ट के 3 जुलाई 2026 के आदेश के बाद दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने अपनी मशीनों और उपकरणों का हिसाब देना शुरू किया। इस मामले में कुल 26 अलग अलग Annexure लगाए गए हैं, जिनमें कई अस्पतालों की रिपोर्ट शामिल है।रिपोर्टों से पता चलता है कि हर अस्पताल में मशीनें बेकार नहीं पड़ी हैं, लेकिन कई जगह महंगे उपकरण इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। इसके पीछे कहीं डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ की कमी है, तो कहीं मशीन खराब है, मरम्मत या जरूरी सामान नहीं मिलने के कारण काम नहीं कर रही है। कुछ उपकरण कोरोना के समय बड़ी संख्या में खरीदे या दान में मिले थे, लेकिन कोरोना का असर कम होने के बाद उनका इस्तेमाल घट गया।

कैंसर इंस्टीट्यूट में महंगी मशीनें इस्तेमाल से बाहर

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कई महंगे उपकरणों के इस्तेमाल से बाहर होने की जानकारी दी गई है। न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में Medical Cyclotron 2017 में खरीदा गया था। रिपोर्ट में इसकी कीमत 25.32 लाख अमेरिकी डॉलर के साथ स्थानीय सप्लाई और दूसरे खर्चों के रूप में भी रकम दर्ज है। यह मशीन फिलहाल स्टाफ की कमी के कारण इस्तेमाल नहीं हो रही।इसी विभाग में Dual Head Gamma Camera भी फिलहाल इस्तेमाल में नहीं है और रिपोर्ट में इसे गैर-कार्यशील बताया गया है। वहीं PET Scanner का इस्तेमाल शुरू करने के लिए जरूरी जांच का इंतजार बताया गया है। 

कैंसर की जांच वाली लैब भी लंबे समय तक बंद रही

कैंसर रिसर्च की Molecular Oncology Lab के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2025 में मौजूदा प्रभारी ने जिम्मेदारी संभाली तो लैब और विभाग काम नहीं कर रहे थे और उपकरण बेकार पड़े थे। अब इन्हें ठीक कराने और सर्विस का काम शुरू करने की बात कही गई है।इस लैब में कई मशीनें सालों पुरानी हैं। उदाहरण के लिए BioSafety Cabinet की कीमत करीब 11.82 लाख रुपये दर्ज है, जबकि Thermocycler की कीमत करीब 7.28 लाख रुपये है। दोनों इस्तेमाल में नहीं थे और मरम्मत/कैलिब्रेशन का काम चल रहा था। एक Flow Cytometer के बारे में रिपोर्ट में बताया गया है कि मशीन पहले काम कर रही थी, लेकिन प्रशिक्षित तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने और रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स व जरूरी सामान की दिक्कत के कारण इसका इस्तेमाल बंद हो गया। रिपोर्ट में इसे दूसरे ऐसे विभाग को देने का सुझाव भी दिया गया है जहां इसका इस्तेमाल हो सके। 

GTB अस्पताल में कोरोना के बाद बड़ी संख्या में उपकरण बचे

गुरु तेग बहादुर अस्पताल की रिपोर्ट में कोरोना के दौरान आए बड़ी संख्या में उपकरणों का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के मामले कम होने के बाद कई उपकरण अतिरिक्त बच गए और स्टोर में रखे हैं।इनमें 193 पल्स ऑक्सीमीटर, 91 वेंटिलेटर, 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, 102 BiPAP मशीन और 73 HFNO मशीन शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से कई उपकरण कोरोना के दौरान इस्तेमाल के लिए खरीदे या दान में मिले थे और बाद में अतिरिक्त हो गए।रिपोर्ट में दर्ज कीमतों के हिसाब से सिर्फ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, BiPAP और HFNO मशीनों की संख्या और प्रति यूनिट कीमत को जोड़ें तो इन तीन तरह के उपकरणों की कीमत ही करीब 6.5 करोड़ रुपये बैठती है। यह आंकलन केवल रिपोर्ट में दी गई प्रति यूनिट कीमत पर आधारित है।

लोक नायक अस्पताल में भी कोरोना के उपकरण पड़े

लोक नायक अस्पताल की रिपोर्ट में कोरोना के समय खरीदे गए उपकरणों में से 44 BiPAP मशीन और 34 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर इस्तेमाल में नहीं होने की जानकारी दी गई है। अस्पताल ने बताया है कि कोरोना के दौरान इन्हें अलग-अलग वार्डों में जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता था। 

कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं मशीन बेकार

डॉ. बीआर सूर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की रिपोर्ट एक अलग समस्या दिखाती है। यहां 19.08 लाख रुपये की Ultrasound Machine पूरी तरह काम करने की हालत में है, लेकिन Radiologist नहीं होने के कारण फिलहाल इस्तेमाल नहीं हो रही। अस्पताल ने बताया है कि नियमित Radiologist का पद भी मंजूर नहीं है और Guest Faculty के तौर पर Radiologist रखने की कोशिश की जा रही है।एक अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट नहीं, इसलिए मशीनें नहीं चल रहीं है।

सीएच. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान की रिपोर्ट में भी स्टाफ की कमी का असर दिखाई देता है। यहां USG मशीन करीब 24.90 लाख रुपये की बताई गई है और उसके इस्तेमाल में न होने की वजह Radiologist की कमी बताई गई है।इसके अलावा X-Ray मशीन के लिए X-Ray Technician नहीं है। कई फिजियोथेरेपी उपकरण इसलिए इस्तेमाल नहीं हो रहे क्योंकि Physiotherapist उपलब्ध नहीं है। 

हर अस्पताल की कहानी एक जैसी नहीं

हाईकोर्ट में दाखिल सभी रिपोर्टों में मशीनों के बेकार होने की बात नहीं कही गई है। उदाहरण के लिए संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, मंगोलपुरी ने कहा कि उसके यहां कोई खरीदा हुआ उपकरण फिलहाल बेकार नहीं पड़ा है।इसी तरह दीप चंद बंधु अस्पताल ने भी ऑडिट के बाद किसी खरीदी गई मशीन के बेकार पड़े होने की जानकारी नहीं दी। बुराड़ी अस्पताल ने भी कहा कि उसके यहां खरीदी गई कोई मशीन इस्तेमाल से बाहर नहीं है। 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ ऑडिट

इन सभी रिपोर्टों का आधार दिल्ली हाईकोर्ट का 3 जुलाई 2026 का आदेश है। अदालत के निर्देश के बाद अस्पतालों को अपने यहां मौजूद मेडिकल मशीनों और उपकरणों की जांच कर यह बताना था कि कौन-सी मशीन इस्तेमाल में है और कौन-सी नहीं।

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