नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जम्मू-कश्मीर गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने मेस से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रशासन पर मेस में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने जिन मांगों को लिखित रूप में मानने का भरोसा दिया था, उन्हें बाद में लागू नहीं किया गया। छात्राओं ने मौजूदा मेस ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने, मेस में सिर्फ महिला कर्मचारियों की तैनाती, प्रोवोस्ट और वार्डन के इस्तीफे और प्रदर्शन करने वाली छात्राओं के खिलाफ किसी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने की मांग की है।
लिखित समझौते के बाद फिर शुरू हुआ प्रदर्शन
छात्राओं के मुताबिक, 11 सितंबर को प्रदर्शन दोबारा शुरू किया गया। उनका आरोप है कि पिछले प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने उनकी 4 मांगों को लिखित तौर पर स्वीकार किया था, लेकिन बाद में इन मांगों को लागू करने से पीछे हट गया। छात्राओं का दावा है कि शुक्रवार सुबह उन्हें नाश्ता नहीं दिया गया। वहीं दोपहर का खाना भी शाम 3 बजे के बाद परोसा गया। उनका यह भी आरोप है कि खाना परोसते समय मेस में पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। छात्राओं के मुताबिक, खाना लेने के लिए उनसे नाम और मोबाइल नंबर भी मांगे गए। उन्होंने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं की निगरानी या उन्हें निशाना बनाने के लिए इस जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ठेकेदार बदलने के दावे पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने आरोप लगाया कि मेस का मौजूदा ठेकेदार वास्तव में बदला ही नहीं गया है। उनका दावा है कि वही व्यक्ति दूसरे नाम से खाना उपलब्ध करा रहा है। छात्राओं के मुताबिक, यह व्यक्ति 2023 से हॉस्टल के खाने के ठेके से जुड़ा रहा है और इससे पहले भी छात्राओं ने उसे जारी रखने के खिलाफ प्रदर्शन किया था। छात्राओं का यह भी आरोप है कि पुरुष कर्मचारियों को हटाकर महिला कर्मचारियों की नियुक्ति करने की मांग के बावजूद 3 पुरुष कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह दूसरे पुरुष कर्मचारियों को लगा दिया गया।
AISA नेता ने लगाए धमकी देने के आरोप
प्रदर्शन को लेकर AISA की जामिया यूनिट के सचिव सौरभ ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि J-K हॉस्टल की छात्राओं ने खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर बार-बार शिकायत की, लेकिन उन्हें कथित तौर पर धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा। सौरभ ने कहा,
'यहां सेंचुरी गेट पर जुटी लड़कियां J-K हॉस्टल की रहने वाली हैं। प्रदर्शन कल शुरू हुआ था। खाने की क्वॉलिटी बेहद खराब थी। बार-बार शिकायत करने के बावजूद छात्राओं को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ा, खासकर प्रोवोस्ट निखत और वार्डन की ओर से।'
सौरभ ने आरोप लगाया कि जिन छात्राओं के माता-पिता ने प्रोवोस्ट से शिकायत को लेकर संपर्क किया, उन्हें भी हॉस्टल से निकालने की धमकी दी गई। उनके मुताबिक, छात्राओं ने रात करीब 9:30 बजे सेंचुरी गेट पर धरना शुरू किया, जो करीब 4 से 5 घंटे तक चला। इसके बाद उन्होंने प्रशासन के सामने 4 मांगें रखीं।
छात्राओं ने प्रशासन के सामने रखी थीं ये 4 मांगें
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनकी पहली मांग मौजूदा मेस ठेकेदार को हटाने की थी। दूसरी मांग मेस में पुरुष कर्मचारियों की जगह महिला कर्मचारियों की तैनाती की थी। तीसरी मांग प्रोवोस्ट निखत के इस्तीफे की थी। वहीं चौथी मांग थी कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाए। सौरभ के मुताबिक, छात्रों की मांगों पर बात करने के लिए डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर, प्रोवोस्ट और डिप्टी प्रॉक्टर की एक टीम छात्राओं से मिली। इस दौरान चारों मांगों को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए।
समझौते के बाद फिर क्यों नाराज हुईं छात्राएं?
सौरभ का आरोप है कि समझौते के बाद छात्राओं ने पाया कि सुबह का नाश्ता नहीं दिया गया और दोपहर का खाना भी काफी देर से मिला। उन्होंने दावा किया कि ठेकेदार को बदलने के बजाय उसी ठेकेदार को दूसरे नाम से काम दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि महिला कर्मचारियों की मांग पूरी करने के बजाय तीन पुरुष कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह दूसरे पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल टीम ने सेंचुरी गेट की लाइटें बंद कर दीं। छात्राओं ने इसे उन्हें डराने या दबाव बनाने की कोशिश बताया।
छात्राओं ने अपनी मांगों को फिर दोहराया
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने एक बार फिर अपनी चारों मांगों को दोहराया है। इनमें मौजूदा मेस वेंडर का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करना, J-K गर्ल्स हॉस्टल मेस में केवल महिला कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करना, प्रोवोस्ट और वार्डन का इस्तीफा और प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के खिलाफ किसी तरह की 'विच हंटिंग' या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने का भरोसा शामिल है। छात्राओं का कहना है कि प्रशासन ने जिन मांगों पर सहमति जताई थी, अब उन्हें जमीन पर लागू किया जाना चाहिए। बता दें कि पिछले साल जामिया में एक विवादित सवाल पूछे जाने पर भी जबरदस्त हंगामा हुआ था। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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