Pollution Ka Solution Conclave: दिल्ली भीषण प्रदूषण से जूझ रही है और क्या क्लाउड सीडिंग राष्ट्रीय राजधानी के प्रदूषण का समाधान हो सकती है? इंडिया टीवी के सम्मेलन 'Pollution Ka Solution' में IIT बॉम्बे के अभिषेक चक्रवर्ती ने कहा कि क्लाउड सीडिंग दिल्ली के प्रदूषण का समाधान नहीं हो सकती और इसका सक्सेस रेट काफी कम है। IIT बॉम्बे के प्रोफेसर के अनुसार, 'सफल क्लाउड सीडिंग के लिए नमी से भरपूर मौसम, उपयुक्त बादल, विशिष्ट तापमान और 50 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता जैसे कारकों की आवश्यकता होती है।'
IIT प्रोफेसर से समझिए क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया
IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि क्लाउड सीडिंग तकनीक से बादलों को आर्टिफिशियल तरीके से इस तरह बदला जाता है कि उनसे अधिक वर्षा हो सके। उन्होंने कहा, 'बादलों में सिल्वर आयोडाइड जैसे कण या रासायनिक घोल मिलाए जाते हैं, जो बीज का काम करते हैं और जिनके चारों ओर जल वाष्प संघनित हो जाती है। ठंडे बादलों में सिल्वर आयोडाइड के कण मिलाए जाते हैं, जिससे पानी और बर्फ जमा हो जाती है। गर्म बादलों में सोडियम क्लोराइड (NaCl) या पोटेशियम क्लोराइड (KCl) जैसे रासायनिक घोल का उपयोग सीडिंग एजेंट के रूप में किया जाता है, जिससे पानी की बूंदों का संलयन होता है और वर्षा होने की प्रक्रिया बेहतर होती है।'
Image Source : India TVइंडिया टीवी कॉन्क्लेव Pollution Ka Solution.
क्या सर्दियों में क्लाउड सीडिंग हो सकती है ?
इस बारे में IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने कहा, 'सर्दी का मौसम क्लाउड सीडिंग के लिए अनुकूल नहीं होता है। हालांकि, कोहरे वाले मौसम में क्लाउड सीडिंग संभव है।'प्रदूषण के स्थायी समाधान पर बात करते हुए, IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने कहा कि सरकार को पराली जलाने पर रोक लगानी चाहिए और औद्योगिक क्षेत्रों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण से निपटना चाहिए। उन्होंने कहा, 'विदेशों में ऐसी तकनीकें उपलब्ध हैं जो औद्योगिक प्रदूषण से निपट सकती हैं, लेकिन हमें इन्हें लागू करने के लिए नीतियों और मानव संसाधन की आवश्यकता है।'
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