दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने के लिए एक्सपर्ट का मानना है कि दिल्ली की हवा साफ करने के लिए एनसीआर में शामिल नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में भी प्रदूषण कम करना होगा। इसका स्थायी समाधान यही है कि दिल्ली के आसपास के सात राज्यों में प्रदूषण कम करना होगा। दिल्ली का वायु प्रदूषण कम करने के लिए जो भी प्रयास किए जाएंगे, उनके कारण सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। इससे निपटने का तरीका बताते हुए डॉ. लवीश भंडारी, (प्रेसिडेंट और सीनियर फेलो, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस) ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर ज्यादा टैक्स लगाया जा सकता है। वहीं, ईवी और अन्य माध्यमों पर छूट दी जा सकती है। अनुमिता रॉयचौधरी, (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, इंडिया) ने कहा कि दिल्ली के लोगों को अभी के अभी फॉसिल फ्यूल वाले वाहनों का उपयोग कर देना चाहिए।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि वाहनों के लिए ऑड-ईवन का नियम लागू करना और पानी का छिड़काव करना स्थायी समाधान नहीं है। अगर धूल उड़ती है तो पानी का छिड़काव करने से धूल के कण भारी होकर गिर जाते हैं। थोड़े समय बाद धूल के कण सूख जाते हैं और दोबारा हवा में मिल जाते हैं। ऑड-ईवन से भी डीजल और पेट्रोल के वाहनों की संख्या में कमी नहीं आती है। इस दौरान विशेषज्ञों से पूछा गया कि दिल्ली एनसीआर के लोगों को कौन सा काम तुरंत बंद कर देना चाहिए और क्या करना शुरू कर देना चाहिए। इसके जवाब में दोनों विशेषज्ञों ने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण कम करने के लिए लोगों को तत्काल प्रभाव से पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों का उपयोग बंद कर देना चाहिए और ईवी का उपयोग शुरू कर देना चाहिए।
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन ने कई उपाय शुरू किए हैं। इंडिया टीवी के 'पॉल्यूशन का सॉल्यूशन कॉन्क्लेव' में बोलते हुए, दिल्ली के मेयर और पार्षद ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली 88 फैक्ट्रियों को नोटिस दिया गया है। 62 हॉटस्पॉट पर स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट किया जा रहा है। प्रदूषण से निपटने के लिए 11 सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें आईआईटी के एक्सपर्ट भी शामिल हैं। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने 3350 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर दिया गया है।

डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली एनसीआर में रहने वाली महिलाओं के लिए खतरा ज्यादा है, क्योंकि वह लगातार पैसिव स्मोकिंग कर रही हैं। उनके लिए जरूरी है कि वह कम से कम घर से बाहर निकलें। उन्हें ज्यादा पानी पीना चाहिए। एंटी ऑक्सीडेंट वाली चीजें खानी चाहिए। इसके साथ ही कमरे में कई तरह के पौधे लगाने चाहिए, जो घर के अंदर साफ हवा देते हैं। जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और एन-95 मास्क लगाकर रखें। इसके साथ ही ध्यान रखें कि सुबह या शाम के समय बाहर न निकलें, क्योंकि इस समय प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है।
प्रदूषण के बीच रहने वाली महिला के पेट में पलने वाले बच्चे पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव होते हैं। इन बच्चों को ऑटिज्म, एलर्जी, ब्रॉन्काइटिस, सोशल फ्रेमवर्क, न्यूरो की समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में समय से पहले डिलीवरी हो सकती है। प्रदूषण की वजह से मिसकैरेज के मामले भी बढ़े हैं। इससे निपटने के लिए महिलाएं गर्भवती होने पर दिल्ली से बाहर रह सकती हैं। हालांकि, यह स्थायी समाधान नहीं है।
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