Monday, March 09, 2026
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Gangaur Puja 2026 Date: गणगौर पूजा कब है 20 या 21 मार्च, नोट कर लें सही तारीख और मुहूर्त

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Mar 09, 2026 01:35 pm IST, Updated : Mar 09, 2026 01:37 pm IST

Gangaur Puja 2026 Date: गणगौर पूजा का पावन पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यानी नवरात्रि के तीसरे दिन मनाया जाता है। ये पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इसे गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। चलिए आपको बताते हैं इस साल गणगौर पूजा कब है।

gangaur puja- India TV Hindi
Image Source : CANVA गणगौर पूजा 2026

Gangaur Puja 2026 Date: गणगौर पूजा का पावन पर्व विवाहित स्त्रियों ही नहीं बल्कि अविवाहित कन्याओं द्वारा भी मनाया जाता है। इस पर्व में भगवान शिव को ईसर जी तो माता पार्वती को गौरा माता के रूप में पूजा जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई क्षेत्रों में ये त्योहार मनाया जाता है। लेकिन राजस्थान में इस पर्व की एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है जहां पूरे 18 दिनों तक ये पर्व मनाया जाता है। यहां इस पर्व की शुरुआत होली के दिन ही हो जाती है और समापन चैत्र शुक्ल तृतीया को होता है। चलिए आपको बताते हैं गणगौर पूजा का मुख्य दिन कब है।

गणगौर पूजा कब है 2026 (Gangaur Puja Kab Hai 2026)

  • गणगौर पूजा - 21 मार्च 2026, शनिवार
  • तृतीया तिथि प्रारम्भ - 21 मार्च 2026 को 02:30 AM बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त - 21 मार्च 2026 को 11:56 PM बजे

गणगौर पूजा मुहूर्त 2026 (Gangaur Puja 2026 Time)

  • शुभ - उत्तम - 07:55 AM से 09:26 AM
  • लाभ - उन्नति - 02:00 PM से 03:31 PM
  • अमृत - सर्वोत्तम - 03:31 PM से 05:02 PM
  • लाभ - उन्नति - 06:33 PM से 08:02 PM

गणगौर पूजा का महत्व (Gangaur Puja Ka Mahatva)

गणगौर पर्व के ईष्ट महादेव व पार्वती हैं। कहते हैं जो सुहागिनें इस दिन व्रत रखती हैं और गणगौर की कथा सुनती हैं उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन महिलायें सोलह श्रृंगार करके व्रत और पूजा करती हैं। फिर शाम में गणगौर की कथा को सुनती हैं। फिर नदी या सरोवर के पास बालू से निर्मित गणगौर की मूर्ति को जल पिलाया जाता है और अगले दिन उनका विसर्जन कर किया जाता है। जिस स्थान पर गणगौर की पूजा की जाती है उस स्थान को गणगौर का पीहर माना जाता है तो वहीं जिस स्थान पर विसर्जन किया जाता है उसे उनका ससुराल माना जाता है। गणगौर पूजा के दिन कई महिलायें माता पार्वती को मैदा, बेसन, आटे और हल्दी से निर्मित गहने अर्पित करती हैं। इन गहनों को गुने कहा जाता है। कहते हैं गणगौर के दिन स्त्रियां जितने गुने माता को अर्पित करती हैं उतना ही अधिक उनका धन-वैभव बढ़ता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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