Budget Session Live: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया है। इस बजट सत्र के भी हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने रविवार को एक महत्वपूर्ण संसदीय रणनीति समूह की बैठक आयोजित की और संसद के बजट सत्र के दौरान संयुक्त रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया।
पिछले महीने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान विपक्ष ने लोकसभा के महासचिव को अविश्वास प्रस्ताव सौंपकर अध्यक्ष को हटाने की मांग की थी। इस प्रस्ताव में विपक्ष ने ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, वामपंथी दलों और अन्य दलों के 118 सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। भाजपा और कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन पंक्ति का व्हिप जारी कर मंगलवार तक सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चला। पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा हुई।
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डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "ईरान के विदेश मंत्री ने ईरानी युद्धपोत लावन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति देने के इस मानवीय कदम के लिए भारत को अपने देश की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया है।"
डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "कल तक हमारे लगभग 67,000 नागरिक वापस लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं। पश्चिम एशिया से हमारे लोगों को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।"
राज्यसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की स्थिति पर बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "हमने दो भारतीय नाविकों (व्यापारिक जहाजों) को खो दिया है, और एक अभी भी लापता है।"
एस. जयशंकर ने कहा, "भारतीय दूतावास ने तेहरान में रह रहे कई भारतीय छात्रों को देश से बाहर स्थानांतरित करने में सहायता की है। व्यापार के सिलसिले में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया जाने और फिर भारत लौटने में मदद की गई। तेहरान स्थित हमारा दूतावास पूरी तरह से कार्यरत है और हाई अलर्ट पर है। हम इस समय भारतीय समुदाय को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना स्वाभाविक रूप से कठिन है, हालांकि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है। भारत शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है तथा मौजूदा परिस्थितियों में तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सरकार वहां की स्थिति का लगातार आकलन कर रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "संघर्ष लगातार तीव्र होता जा रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में काफी गिरावट आई है। संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है और विनाश बढ़ता जा रहा है। सामान्य जीवन और गतिविधियां स्पष्ट रूप से प्रभावित हो रही हैं।"
पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। हम एक पड़ोसी क्षेत्र हैं और पश्चिम एशिया की स्थिरता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ईरान में भी अध्ययन या रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय मौजूद हैं। यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें तेल और गैस के कई महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता शामिल हैं। आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान और अस्थिरता का माहौल गंभीर मुद्दे हैं।"
पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में बयान देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया में उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।"
विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।"
राज्यसभा में बोलते हुए विपक्ष के सांसद मल्लिकार्जुन खर्गे ने कहा, "नियम 176 के तहत, मैं पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए उभरती चुनौतियों के मुद्दे पर चर्चा करने की अनुमति का अनुरोध करता हूं।"
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा आज संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर दिए जाने वाले बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "हमें उनका बयान सुनना होगा। लेकिन हम इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं। यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। देश इससे बुरी तरह प्रभावित है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। आज सुबह तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। कतर से गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी गई है। फिलहाल कतर से हमारे कारखानों को भारत में गैस नहीं मिल रही है। हम पूर्वी देशों से गैस प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए हम कुछ आपूर्ति प्राप्त करने का प्रयास करेंगे, लेकिन हम निश्चित रूप से इससे प्रभावित हो रहे हैं। कीमतें बढ़ रही हैं। परसों ही एलपीजी की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई। और निश्चित रूप से, पेट्रोल भी महंगा होने वाला है। इसलिए यह सब हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या बनने वाला है। और इसलिए, हमें सरकार से एक बहुत ही जिम्मेदार और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।"
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "संसद के बजट सत्र का दूसरा भाग आज से शुरू होने जा रहा है। दुख की बात है कि इसकी शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी द्वारा उन्हें हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव से हो रही है। हम इसका जवाब देंगे, लेकिन कांग्रेस को यह सोचना चाहिए कि संवैधानिक पदों और संवैधानिक गरिमा को कमजोर करने के लिए वे किस हद तक जा सकते हैं। वे अदालत की टिप्पणियों की आलोचना करते हैं। वे चुनाव आयोग की अवहेलना करते हैं। वे लोकतंत्र की अवहेलना करते हैं। ये कांग्रेसी सिर्फ एक परिवार में विश्वास रखते हैं। हम सदन में इसका पुरजोर जवाब देंगे, लेकिन कांग्रेस को इसका पछतावा होगा। लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ बिना किसी कारण और बिना सोचे-समझे, एक व्यक्ति की हठधर्मिता को संतुष्ट करने के लिए लाया गया यह प्रस्ताव हार जाएगा। लेकिन कांग्रेस को इसका बहुत पछतावा होगा और देश की जनता इसे देखेगी।"
हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
कार्यवाही शुरू होने से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "अभी फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी जिसके बाद तय होगा कि आगे कैसे बढ़ें। हमारी विदेश नीति को भाजपा सरकार ने गिरवी रख दिया है। महंगाई बढ़ती जा रही है। हमारे जो लोग विदेश में फंसे हुए हैं उनके लिए भारत सरकार क्या कर रही है?"
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