1. Hindi News
  2. Explainers
  3. EXPLAINER: नेपाल की संसद के सिर्फ 60% सांसदों को ही सीधे क्यों चुन पाती है जनता? समझिए चुनाव का पूरा सिस्टम

EXPLAINER: नेपाल की संसद के सिर्फ 60% सांसदों को ही सीधे क्यों चुन पाती है जनता? समझिए चुनाव का पूरा सिस्टम

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Mar 05, 2026 07:43 am IST,  Updated : Mar 05, 2026 07:52 am IST

Nepal Parliament Election System: नेपाल की संसद के 60 फीसदी सदस्यों को देश की जनता सीधे चुनती है जबकि बाकी 40 प्रतिशत सांसदों का चयन राजनीतिक पार्टियां ही अपने हिसाब से करती हैं। नेपाल की संसद में ऐसा सिस्टम क्यों फॉलो होता है, इसके बारे में समझिए।

Nepal General Election 2026- India TV Hindi
नेपाल में मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम फॉलो होता है। Image Source : AP

Nepal General Election 2026: नेपाल में आज (गुरुवार को) आम चुनाव है। लोग बड़ी संख्या में पोलिंग बूथ पर पहुंचकर वोटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। सितंबर, 2025 के हिंसक GenZ आंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार के बजाय नेपाल में अब नई संसद चुनी जा रही है। लगभग 3 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में इस बार का इलेक्शन कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि यह युवा लीडरशिप वाले आंदोलन के बाद हो रहा पहला आम चुनाव है। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न है कि आखिर नेपाल की संसद में महज 60 फीसदी सांसदों को ही जनता सीधे क्यों चुनती है।

नेपाल की संसद का स्ट्रक्चर

जान लें कि नेपाल की संघीय संसद का निचला सदन प्रतिनिधि सभा यानी House of Representatives है, जिसमें कुल 275 मेंबर होते हैं। इनमें से 60 फीसदी यानी 165 सांसदों का चुनाव जनता सीधे करती है। यानी वोटर अपने क्षेत्र के कैंडिडेट को मत देकर चुनते हैं। लेकिन बाकी 110 सीटें सीधे जनता के चुनाव से नहीं भरी जातीं। इन्हें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली यानी Proportional Representation System के माध्यम से भरा जाता है। इसमें सियासी दलों को नेपाल भर में मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें दी जाती हैं और पार्टियां अपनी लिस्ट से सांसदों को नामित करती हैं।

मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम फॉलो करता है नेपाल

गौरतलब है कि नेपाल 2015 के नए संविधान के बाद Mixed Electoral System को फॉलो करता है। इस सिस्टम में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट यानी जनता से सीधे चुनाव और प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन यानी 110 सीटें पार्टियों के वोट प्रतिशत के आधार पर चुनाव, दोनों मॉडल एक साथ लागू होते हैं।

इसका उद्देश्य है कि पार्लियामेंट में महज बड़ी राजनीतिक पार्टियों का दबदबा न हो, बल्कि छोटे सियासी दलों और अलग-अलग समुदायों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिल सके। नेपाल जैसे- बहुभाषी और बहु-जातीय समाज में समावेशी प्रतिनिधित्व को संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

इस सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ी?

बता दें कि नेपाल में लंबे वक्त तक राजनीतिक अस्थिरता रही। सत्ता संघर्ष हुए। फिर 2015 के संविधान के बाद यह तय हुआ कि पार्लियामेंट में महिलाओं, जनजातीय समूहों और पिछड़े इलाकों के लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। Proportional Representation System से राजनीतिक पार्टियों के लिए अपनी लिस्ट में इन वर्गों को शामिल करना अनिवार्य है।

नेपाल चुनाव के लिए नतीजे कैसे आएंगे?

चुनाव आयोग के अनुसार, 165 सीधे चुनी गई सीटों के परिणाम अगले 2 दिन में आ सकते हैं, जबकि 110 आनुपातिक सीटों के लिए सांसद चुनने में 2-3 दिन और लग सकते हैं। यहां बैलेट पेपर से वोटिंग हो रही है तो उन्हें गिनने में करीब 48 घंटे का वक्त लग सकता है।

नेपाल में चुनाव का सिस्टम कठिन जरूर लगता है, लेकिन इसका उद्देश्य संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व तय करना है। पब्लिक भले ही 60 फीसदी सांसद सीधे चुने, लेकिन बाकी 40 प्रतिशत सीटें यह सुनिश्चित करती हैं कि पार्लियामेंट, नेपाल की विविधता को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करे। यही कारण है कि नेपाल ने Mixed Electoral System को अपनाया है।

ये भी पढ़ें- नेपाल के चुनाव में 6500 से ज्यादा उम्मीदवार, जनता किसपर जताएगी भरोसा

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।