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हाईकोर्ट से अभिषेक बनर्जी को मिली अंतरिम राहत, फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID ने की पूछताछ

 Reported By: Onkar Sarkar Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jun 11, 2026 11:04 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 11:51 pm IST

कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के लिए CID मुख्यालय पहुंचे। अदालत ने उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया और 2 सप्ताह तक किसी भी कठोर कार्रवाई से संरक्षण दिया।

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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी। Image Source : REPORTER'S INPUT

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी गुरुवार को कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के लिए शाम करीब 6 बजे पश्चिम बंगाल CID मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंचे। CID ने बनर्जी से रात करीब 11:30 बजे तक पूछताछ की। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश देते हुए शाम 6 बजे तक CID के सामने पेश होने को कहा था। हालांकि अदालत ने उन्हें 2 सप्ताह तक किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई (कोअर्सिव एक्शन) से अंतरिम राहत भी प्रदान की है।

2 बागी विधायकों की शिकायत पर हो रही जांच

यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक प्रस्ताव पर विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप से जुड़ा है। CID तृणमूल कांग्रेस के 2 बागी विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायत की जांच कर रही है। दोनों विधायकों ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के नेता के रूप में बालीगंज विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति से संबंधित पार्टी प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षरों की जालसाजी की गई थी।

 विधानसभा सचिवालय ने दर्ज कराई थी FIR

शिकायत मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता पुलिस में FIR दर्ज कराई थी। बाद में राज्य के गृह सचिव ने जांच CID को सौंप दी। जांच एजेंसी ने डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को 3 बार पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए वह पेश नहीं हुए थे। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी या किसी अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कौशिक चंदा ने कहा कि जांच करना CID का अधिकार है और अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद

कोर्ट ने साथ ही अभिषेक बनर्जी को 2 सप्ताह की अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि इस अवधि में उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में CID को उनसे दोबारा पूछताछ करनी हो तो कम से कम 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि संबंधित प्रस्ताव की मूल प्रति अभिषेक बनर्जी के पास है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष को उसकी फोटोकॉपी सौंपी गई थी।

'हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता'

मजूमदार ने दावा किया कि कम से कम 5 विधायकों ने कहा है कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। मजूमदार ने तर्क दिया कि जब तक मूल प्रस्ताव बरामद नहीं होता, जांच आगे नहीं बढ़ सकती और इसलिए अभिषेक बनर्जी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है। हालांकि अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि किसी भी आरोपी को ऐसा दस्तावेज पेश न करने का अधिकार है, जो उसके खिलाफ जा सकता हो।

एयरपोर्ट पर अभिषेक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

अभिषेक बनर्जी की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता अयान बनर्जी ने कहा कि सीआईडी का नोटिस पूछताछ से ज्यादा दस्तावेज हासिल करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर कार्रवाई से सुरक्षा दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी दिल्ली से कोलकाता लौटे। कोलकाता एयरपोर्ट पर उनके पहुंचने के दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

गाड़ी से सीधे CID मुख्यालय के अंदर गए अभिषेक बनर्जी

एयरपोर्ट पर भीड़ ने नारेबाजी भी की और कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि सुरक्षा बलों ने घेरा बनाकर उन्हें सुरक्षित उनकी गाड़ी तक पहुंचाया। अभिषेक बनर्जी पर पहले भी हमला हो चुका है, इसलिए इस बार उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। इसके बाद अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे भारी सुरक्षा के बीच CID मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंचे। सुरक्षा कारणों से उनकी गाड़ी को सीधे परिसर के अंदर ले जाया गया और वह वाहन से बाहर सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। इसके बाद CID अधिकारियों ने उनसे मामले में पूछताछ शुरू की।

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