आप ऑफिस जाते समय या फिर कहीं बाहर घूमने जाते हैं तो जूता पहनकर ही जाते होंगे लेकिन क्या आप घर के पास वाली मार्केट में जाने के लिए, छत या फिर किसी पार्क में टहलते समय या फिर कहीं लोकल एरिया में जाने के लिए भी जूता ही पहनते हैं? जाहिर सी बात है कि आप ऐसा नहीं करते होंगे। इन सभी कामों के लिए आप हवाई चप्पल पहनते होंगे। कई सारे लोग घर के अंदर भी हवाई चप्पल में नजर आते हैं लेकिन क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल आया है कि हवाई चप्पल में हवाई शब्द कहां से आया। यह चप्पल हवा में तो उड़ता नहीं है फिर इसे हवाई चप्पल क्यों कहते हैं? आइए हम आपको इसका जवाब देते हैं।
आखिर कहां से आया यह 'हवाई' शब्द?
कई सारे लोग यह सोचते होंगे कि ये चप्पल पहनने में काफी हल्के होते हैं और पैर को बहुत आराम देते हैं, इसी कारण इन्हें हवाई चप्पल कहा जाता होगा लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक हवाई चप्पल में हवाई शब्द अमेरिका के एक आइलैंड 'Hawai' से जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि शुरुआती दौर में हवाई द्वीप पर पाए जाने वाले 'टी' पेड़ के रबर से इसे बनाया जाता था और वहीं से चप्पल में हवाई शब्द जुड़ा। वहीं चप्पल शब्द हिंदी के 'Chap'से आया है, इसका मतलब पीछे छूटने वाला निशान।
अब कैसे बनते हैं ये चप्पल?
क्या आप यह जानते हैं कि आज के दौर में ये चप्पल कैसे बनते हैं। आज के समय में इन चप्पलों को बनाने के लिए EVA या दूसरे मटीरियल की शीट को हाथ से या कटिंग डाई का इस्तेमाल करके मनचाहे आकार में काटा जाता है। यह फ्लिप-फ्लॉप का बेस होता है, जिसमें उसी समय स्ट्रैप के लिए छेद किए जाते हैं। स्ट्रैप PVC या रबर जैसे ज्यादा लचीले मटीरियल से बनाए जाते हैं। उन्हें मनचाहे आकार में ढाला जाता है और मजबूती के लिए स्ट्रैप के सिरों पर प्लास्टिक स्टॉप लगाए जाते हैं। आम तौर पर, स्ट्रैप को छेदों से गुज़ारकर हाथ से जोड़ा जाता है। एक छोटी प्लास्टिक डिस्क स्ट्रैप को उन छेदों में वापस जाने से रोकती है जिनमें उसे डाला गया था।
नोट: इस आर्टिकल में हवाई चप्पल से जुड़ी जो जानकारी दी गई है, वो अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है।
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