Friday, March 06, 2026
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Explainer: नेपाल में जीत की ओर बढ़ रही बालेन शाह की RSP, जानें भारत के लिए क्या हैं इसके मायने

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Mar 06, 2026 02:52 pm IST, Updated : Mar 06, 2026 02:52 pm IST

नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। ‘नेपाल फर्स्ट’ नीति के साथ पार्टी भ्रष्टाचार विरोध, IT निर्यात और नई कूटनीति पर जोर दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत-नेपाल संबंधों में व्यावहारिक साझेदारी बढ़ सकती है और दोनों देशों को आर्थिक व रणनीतिक लाभ मिल सकता है।

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Image Source : PTI एक चुनावी अभियान के दौरान RSP के अध्यक्ष रबी लामिछाने और पीएम कैंडिडेट बालेंद्र शाह।

Nepal Elections News: नेपाल में गुरुवार को हुए मतदान के बाद देर रात वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी शुरुआती रुझानों में बहुत आगे चल रही है। यह नेपाल का पहला आम चुनाव है, जो जेन Z के हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुआ है। इन प्रदर्शनों के चलते पुरानी सरकार गिर गई थी जिसके बाद नए सिरे से चुनाव कराए गए। अभी तक मिले रुझानों को देखते हुए यह तय लग रहा है कि RSP ही नेपाल में प्रचंड बहुमत के साथ अगली सरकार बनाने जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर RSP सत्ता में आई तो भारत के प्रति इसका रुख क्या होगा? आइए, समझने की कोशिश करते हैं।

कैसे शुरू हुई थी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी?

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेपाल की एक सेंट्रिस्ट राजनीतिक पार्टी है। पार्टी संवैधानिक समाजवाद, बाजार समाजवाद, प्रगतिशीलता, भागीदारी लोकतंत्र, आर्थिक उदारवाद और राजनीतिक स्वतंत्रता का समर्थन करती है। इसकी शुरुआत रबी लामिछाने ने जून 2022 में की थी और जुलाई 2022 में यह चुनाव आयोग में रजिस्टर हुई। 2022 के चुनाव में RSP चौथी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी बनी। पार्टी प्रचंड सरकार में 2 बार सहयोगी रही पहली बार दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक और दूसरी बार मार्च 2024 से जुलाई 2024 तक। RSP का कहना है कि उसका कोई अन्य संगठन नहीं होगा, इसमें कोई कैडर नहीं होगा सिर्फ सदस्य होंगे।

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Image Source : PTIनेपाल चुनावों में करीब 60 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

RSP का चुनावी मैनिफेस्टो 'बाचा पत्र'

RSP ने अपने चुनावी मैनिफेस्टो को 'बाचा पत्र' नाम दिया है। इसमें नेपाल को मध्यम आय वाला देश बनाने का सपना देखा गया है। पार्टी IT निर्यात को प्राथमिकता दे रही है और अगले 10 साल में इसे 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सभी सार्वजनिक संपत्तियों की 1990 से जांच का वादा है। 'नेपाल फर्स्ट' नीति के तहत पार्टी पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर मेरिट आधारित ऊर्जा कूटनीति और डिजिटल संप्रभुता पर पार्टी का जोर है। कुल मिलाकर RSP एक ऐसे नेपाल का निर्माण करना चाहती है जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो और भविष्य की तरफ देखता हो।

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Image Source : PTIबालेन शाह नेपाल के युवाओं में एक लोकप्रिय चेहरा है।

भारत के प्रति क्या है RSP का नजरिया?

RSP की 'नेपाल फर्स्ट' नीति नेपाल को भारत और चीन के बीच 'ज्वलंत पुल' बनाने की बात करती है। इससे त्रिपक्षीय आर्थिक फायदे हो सकते हैं। पार्टी 1950 के भारत-नेपाल संधि को नया रूप देने की बात कर रही है, ताकि दोनों देशों के बीच रिश्ता और पारदर्शी, लेन-देन आधारित और मौजूदा दौर के मुताबिक बने। इसे भारत के लिए अच्छी खबर कहा जा सकता है। दोनों देशों में पुराने 'ऐतिहासिक जुड़ाव' की जगह अब 'व्यावहारिक साझेदारी' ले सकती है, जहां नेपाल की IT और ऊर्जा महत्वाकांक्षाएं भारत के साथ मिलकर काम करेंगी। नेपाल का 30 अरब डॉलर का IT लक्ष्य भारत की टेक इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देगा एवं दोनों पड़ोसियों में भरोसा और मजबूत होगा।

भारत को कैसे हो सकता है फायदा?

RSP का 'नेपाल फर्स्ट' दृष्टिकोण आक्रामक रणनीतिक स्वायत्तता की बात करता है, लेकिन यह भारत के साथ संतुलित विकास का रास्ता खोलेगा। भारत के पारंपरिक सुरक्षा हित अब नेपाल की महत्वाकांक्षाओं के साथ जुड़कर और मजबूत हो सकते हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि नेपाल इसके लिए चीन से किनारा करेगा, लेकिन अगर RSP सत्ता में आती है तो भारत-नेपाल के रिश्तों में एक नया आयाम देखने को मिल सकता है। पुरानी राजनीतिक व्यवस्था बदलने से नेपाल का विकास तेज हो सकता है, जो भारत के लिए भी फायदेमंद है। इस तरह देखा जाए तो नेपाल में होने वाला संभावित बदलाव भारत के लिए सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का द्वार है।

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