शेयर मार्केट में सोमवार को एक बार फिर भूचाल आ गया है, जहां बाजार के खुलने के महज 10 मिनट में निवेशकों की मेहनत की कमाई ₹15,00,000 करोड़ से ज्यादा की रकम देखते-देखते स्वाहा हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी से आई गिरावट ने छोटे-बड़े, नए-पुराने सभी निवेशकों को गहरी चोट पहुंचाई है। कुछ ही मिनटों में मार्केट कैप में लाखों करोड़ की भारी भरकम कमी आई, जिससे दालाल स्ट्रीट पर हाहाकार मच गया। ये गिरावट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदों, सपनों और बचत पर सीधा वार है। कौन से स्टॉक्स सबसे ज्यादा डूबे? किन वजहों से बाजार इतनी तेजी से लुढ़का? और अब क्या होगा आगे? आइए जानते हैं उन प्रमुख स्टॉक्स की चर्चा करते हैं, जिन्होंने निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और बाजार को इस बार के सबसे बड़े झटके में धकेला।
मार्केट में कैप में भारी कमी
सुबह के सत्र के दौरान बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बीते सत्र के 450 लाख करोड़ रुपये से घटकर 438 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी करीब निवेशकों के पोर्टफोलियों में करीब 12 लाख करोड़ रुपये की कमी हो गई। यानी इतनी राशि निवेशकों ने गंवा दी।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर ने लगाए गोते
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते सोमवार सुबह कारोबार के दौरान तेल विपणन कंपनियों और पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। तेल कंपनियों के नतीजों में सबसे ज्यादा दबाव रहा। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर 8.67% गिर गए, जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर 8.43% गिर गए। वहीं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नतीजों में 7.29% की गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच वैश्विक तेल कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया और यह 24.71% बढ़कर 112.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर पेंट कंपनियों के नतीजों पर भी पड़ा। एशियन पेंट्स के शेयर 5.12% गिर गए, जबकि इंडिगो पेंट्स में 4.83% की गिरावट आई। इसके अलावा बर्जर पेंट्स इंडिया के शेयर 4.80% और कंसाई नेरोलैक पेंट्स के शेयर 4.72% तक गिर गए।
लार्जकैप कैटेगरी के इन स्टॉक्स ने दिया जोरदार झटका
बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल स्टॉक्स आज सुबह के सत्र में तेज गिरावट के साथ लुढ़क गए। इनमें इंडिगो शेयर (8%), एसबीआई शेयर (5.90%), टाटा स्टील शेयर (4.99%), एशियन पेंट्स शेयर (4.71%), एलटी शेयर (4.7%), मारुति शेयर (4.67%), एक्सिस बैंक शेयर (4.02%) और अदानी पोर्ट्स शेयर (3.80%) फ्लिपकार्ट कारोबार कर रहे थे। वहीं मिडकैप में हिंदुस्तान पेट्रोलियम शेयर (7.20%), अशोक लेलैंड शेयर (5.10%), फेडरल बैंक शेयर (4.60%), भारत फोर्ज शेयर (4.50%), पेटीएम शेयर (4.40%) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शेयर (3.80%) की गिरावट में कारोबार कर रहे थे।
स्टॉक मार्केट तहस-नहस
सोमवार को दोपहर 12 बजे बीएसई सेंसेक्स एक समय 1800.89 अंक की गिरावट के साथ 77,118.01 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई का निफ्टी 563.8 अंक की जोरदार गिरावट के साथ 23,886.65 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा।
बाजार को लेकर विशेषज्ञ ने क्या कहा?
शेयर बाजार विशेषज्ञ सुनील शाह का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें वापस 75 डॉलर के आसपास नहीं आतीं और पश्चिम एशिया की स्थिति शांत नहीं होती या किसी प्रकार का समझौता नहीं हो जाता, तब तक बाजार का ऊपर जाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बीच-बीच में तकनीकी उछाल (टेक्निकल रिबाउंड) देखने को मिल सकता है, लेकिन बाजार की मूल प्रवृत्ति (अंडरटोन) अभी भी कमजोर यानी बेयरिश बनी हुई है।
सुनील शाह के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70–75 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का देश की जीडीपी वृद्धि पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि जीडीपी वृद्धि अनुमान के अनुरूप नहीं रहती है तो इसका असर कॉरपोरेट इंडिया पर भी पड़ता है। इससे कंपनियों की कमाई (कॉरपोरेट अर्निंग्स) और टॉप लाइन प्रभावित होती है। अगर ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ती है और कंपनियों की कमाई घटती है, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ेगा और बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।






































