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स्टॉक मार्केट की होली के रंग में फिर गया पानी, मिडिल ईस्ट के टेंशन से सेंसेक्स 1539 अंक टूटा, निफ्टी भी क्रैश

 Published : Mar 04, 2026 09:55 am IST,  Updated : Mar 04, 2026 10:12 am IST

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट भारी युद्ध के दायरे में आ गया है। बड़े हमलों ने निवेशकों को चिंता में ला दिया है।

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सेंसेक्स 1539 अंक टूटा, निफ्टी भी क्रैश Image Source : FREEPIK

शेयर बाजार की होली बुधवार को फीकी हो गई। मिडिल ईस्ट के टेंशन ने होली के रंग में भंग कर दिया। सुबह 9 बजकर 19 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स एक समय 1539.33 अंक टूटकर 78,699.52 के लेवल पर लुढ़कता देखा गया। इसी समय, एनएसई का निफ्टी 468.25 अंक की भारी गिरावट के साथ 24,397.45 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। 

निफ्टी के गिरने वाले और बढ़त वाले प्रमुख शेयर

शुरुआती कारोबार में निफ्टी में प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी), इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। वहीं, बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, इंफोसिस, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी), कोल इंडिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) शामिल रहे।

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Image Source : BSEस्टॉक मार्केट

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगभग 1.5% की कमजोरी देखी जा रही है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि Israel, United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है और आने वाले समय में भी बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और सुरक्षा जोखिमों के चलते Strait of Hormuz से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर इंश्योरेंस लागत और प्रतिबंध बढ़ गए हैं। इससे कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है।

तेल कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने और सप्लाई चेन पर दबाव की आशंका गहरा गई है, जो आगे चलकर इक्विटी बाजार की चाल पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

भारतीय मुद्रा में भारी दबाव में

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक निवेशकों की देनदारियों के कारण रुपये में लगातार कमजोरी देखी जा रही है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते सुरक्षित निवेश देनदारियों की मांग बढ़ेगी है, जिससे यूनाइटेड स्टेट्स डॉलर मजबूत हुआ है और उभरती हुई बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। विश्लेषकों का रुझान है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबा खंटा है तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।

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