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बजट 2026 में छिपे बड़े TAX बदलाव, आपने ध्यान दिया! 1 अप्रैल से पहले जानना जरूरी

नया आयकर अधिनियम 2025 सरल भाषा, कम धाराओं और डिजिटल फॉर्म्स के साथ आएगा। ये बदलाव मुख्य रूप से अनुपालन आसान बनाने, विवाद कम करने और करदाताओं के प्रति विश्वास बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Feb 03, 2026 10:41 pm IST, Updated : Feb 03, 2026 10:47 pm IST
नॉन-रेजिडेंट से प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय खरीदारों को अब TAN लेने की आवश्यकता नहीं होगी। - India TV Paisa
Photo:PIXABAY नॉन-रेजिडेंट से प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय खरीदारों को अब TAN लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

बजट 2026-27 को 1 फरवरी 2026 को पेश करने के बाद वित्त मंत्रालय ने आयकर विभाग के जरिए आयकर से संबंधित डिटेल सवाल-जवाब (FAQ) जारी किए हैं। ये स्पष्टीकरण फाइनेंस बिल 2026 का हिस्सा हैं और काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो रहा है। नए वित्त वर्ष में रिटर्न फाइलिंग, आय की रिपोर्टिंग, पेनल्टी, प्रॉसिक्यूशन, TDS और टैक्स नोटिस से जुड़े तरीकों को काफी हद तक बदल जाएंगे। बजट में व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अनुपालन आसान बनाने, विवाद कम करने और करदाताओं को राहत देने पर फोकस है। 

बजट 2026-27 के 15 प्रमुख आयकर बदलाव 

अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा में विस्तार

करदाता अब 48 महीने (4 साल) तक अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, भले ही मूल रिटर्न फाइल न किया हो। देरी के आधार पर अतिरिक्त टैक्स 25% से बढ़कर 70% तक हो सकता है।

अपडेटेड रिटर्न में नुकसान (Loss) की समायोजन
अपडेटेड रिटर्न में गलत तरीके से अधिक दिखाए गए नुकसान को कम किया जा सकता है, जिससे करदाताओं को सुधार का मौका मिलेगा।

री-असेसमेंट नोटिस के बाद भी अपडेटेड रिटर्न
री-असेसमेंट नोटिस मिलने के बाद भी निर्धारित समय में अपडेटेड रिटर्न फाइल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में घोषित आय पर पेनल्टी से छूट मिलेगी।

नॉन-ऑडिट मामलों में ITR फाइलिंग डेडलाइन बढ़ी
नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। सैलरीड क्लास (वेतनभोगी) के लिए डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी।

मोटर एक्सीडेंट क्लेम पर ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है। इस पर TDS भी नहीं कटेगा।

NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर TAN की जरूरत खत्म
नॉन-रेजिडेंट से प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय खरीदारों को अब TAN लेने की आवश्यकता नहीं होगी। PAN के आधार पर ही TDS कटेगा।

मैनपावर सप्लाई पर TDS नियम स्पष्ट
'वर्क' की परिभाषा में मैनपावर सप्लाई को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिससे TDS दर (1% या 2%) को लेकर भ्रम दूर होगा।

कम या निल TDS सर्टिफिकेट प्राप्त करना आसान
छोटे करदाता अब ऑनलाइन आवेदन से कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

MF, डिविडेंड और बॉन्ड पर एक ही डिक्लेरेशन
निवेशक अब टैक्स कटौती से छूट के लिए एक ही डिक्लेरेशन (जैसे Form 15G/15H) कई स्रोतों को दे सकते हैं, खासकर डिपॉजिटरी के माध्यम से।

अघोषित आय पर टैक्स में राहत
अनएक्सप्लेन्ड इनकम पर टैक्स दर 60% से घटाकर 30% कर दी गई है। स्वेच्छा से आय घोषित करने पर पेनल्टी नहीं लगेगी।

असेसमेंट और पेनल्टी का एक साथ आदेश
टैक्स विभाग अब एक ही ऑर्डर में असेसमेंट और पेनल्टी जारी करेगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया छोटी और तेज होगी।

पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन में ज्यादा राहत
मिस-रिपोर्टिंग या अन्य मामलों में तय ड्यूटी चुकाने पर पेनल्टी और जेल से छूट मिलेगी।

कई पेनल्टी अब फिक्स्ड फीस में बदल गईं
कई मामलों में पेनल्टी की जगह फिक्स्ड फीस लगेगी, जिसमें 'रिजनेबल कॉज' का विकल्प नहीं होगा।

आयकर अपराधों का डीक्रिमिनलाइजेशन
टैक्स कानून को कम सख्त बनाया गया है। जेल की सजा कम की गई है और कई मामलों में सिर्फ जुर्माना लगेगा।

PF और ESI जमा पर राहत
कर्मचारियों के PF और ESI योगदान की कटौती अब ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि तक जमा करने पर भी डिडक्शन मिलेगा।

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