सोने और चांदी की कीमत में बीते कुछ समय से हैरान करने वाला उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना काफी चुनौतीपूर्ण है कि वह किसमें निवेश करें। सोना या चांदी। जैसा कि आप जानते हैं अभी चंद रोज पहले ही चांदी 4,00,000 रुपये के लेवल को पार कर गई थी। ऐसे में समझदारी भरा फैसला लेना जरूरी है। उदाहरण के लिए अगर आपके पास ₹10,000 की राशि है और आप तय नहीं कर पा रहे हैं कि सोने में निवेश करें या चांदी में, तो यह फैसला आपकी निवेश रणनीति, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश अवधि पर निर्भर करता है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि किस विकल्प में कितनी समझदारी है।
सोना: स्थिरता और सुरक्षा का भरोसेमंद विकल्प
जहां तक सोने में निवेश की बात करें तो सोना लंबे समय से निवेशकों के लिए सेफ हेवन माना जाता रहा है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव चांदी की तुलना में कम होता है, जिससे यह लंबी अवधि में पूंजी संरक्षण के लिए बेहतर विकल्प बनता है।
₹10,000 में निवेश के हैं ये ऑप्शन
- 24 कैरेट गोल्ड कॉइन
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)
- गोल्ड ETF या डिजिटल गोल्ड
किसके लिए है सही
अगर आप कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों में से हैं और लंबे समय के निवेश की योजना बनाने वालों में से हैं तो आप इनका चुनाव कर सकते हैं।
चांदी: ज्यादा उतार-चढ़ाव, ज्यादा रिटर्न का मौका
चांदी की कीमत सोने की तुलना में कम होने के कारण इसमें ज्यादा मात्रा खरीदी जा सकती है। साथ ही सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में बढ़ती औद्योगिक मांग इसकी कीमतों को सपोर्ट देती है। तेजी के दौर में चांदी बेहतर रिटर्न दे सकती है।
₹10,000 में निवेश के हैं ये विकल्प
- सिल्वर कॉइन या बार
- सिल्वर ETF
किसके लिए है ये सही
अगर आप थोड़ा अधिक जोखिम उठाने वाले निवेशकों में से हैं और मध्यम अवधि में बेहतर मुनाफे की तलाश करने वालों में से हैं तो इनमें आप निवेश कर सकते हैं। तो आखिर ₹10,000 का निवेश किसमें करना है समझदारी? इसके लिए आप निम्न बातों को गौर करें:
- अगर सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से देखें तो सोना बेहतर होगा।
- जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो चांदी बेहतर है।
क्या है गुड आइडिया?
अगर आप बैंलेस चाहते हैं तो इसका सबसे संतुलित तरीका यह भी है कि ₹5,000 सोने में और ₹5,000 चांदी में निवेश करें। एक्सपर्ट की सलाह यह है कि फिजिकल सोना या चांदी खरीदने की बजाय ETF या डिजिटल गोल्ड/सिल्वर में निवेश करने से आपका मेकिंग चार्ज से बचाव होता है। स्टोरेज की चिंता नहीं रहती। खरीद-बिक्री ज्यादा आसान रहती है। यह स्ट्रैटेजी छोटे निवेशकों के लिए ज्यादा व्यावहारिक मानी जाती है।






































