सोने और चांदी की कीमत में भारी उठा-पटक जारी है। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को चांदी की कीमत 52,000 रुपये घट गई। लगातार तीसरे दिन तेज गिरावट के साथ चांदी की कीमत 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। कमजोर वैश्विक रुझान और मजबूत अमेरिकी डॉलर इसके मुख्य कारण बने। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमत में लगभग 17% की गिरावट आई। इससे पहले शनिवार को चांदी 72,500 रुपये यानी 19% गिरकर 3,12,000 प्रति किलोग्राम पर थी। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत 1,44,500 रुपये यानी करीब 36% घट गई है। 29 जनवरी को यह अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी।
सोने की कीमतें भी भारी गिरावट
99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमतें भी गिरावट का सामना कर रही हैं। सोमवार को सोना 12,800 रुपये यानी 7.73% गिरकर 1,52,700 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। पिछली सत्र में यह 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम था। तीन सत्रों में सोने की कीमत में कुल 30,300 रुपये यानी लगभग 17% की गिरावट आई। 29 जनवरी को सोना अपने रिकॉर्ड हाई 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। निवेशक तेज रैली के बाद मुनाफा लेने में जुटे रहे।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा कि सोना और चांदी अमेरिकी डॉलर के मजबूती के चलते दबाव में रहे। ट्रंप के टैरिफ वार्ता और अमेरिका-ईरान तनाव में कमी की खबरों के बीच अमेरिकी शटडाउन की आशंका स्थगित होने से भी तरलता बढ़ी। लेमोन मार्केट्स के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सोना और चांदी के आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे घरेलू कीमतों के लिए एक संभावित तात्कालिक कारक गायब हो गया।
वैश्विक बाजार में भी गिरावट
वैश्विक स्तर पर भी सोना और चांदी कमजोर रहे। सोने की स्पॉट कीमत 83.75 डॉलर यानी 1.72% गिरकर 4,781.60 डॉलर प्रति औंस रह गई। मिराय एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट प्रवीण सिंह ने कहा कि स्पॉट गोल्ड सप्ताह की शुरुआत नकारात्मक रुख के साथ हुई और तेज बिकवाली के दबाव में रहा। मजबूत डॉलर और ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेड चेयर नियुक्त करने से भी दबाव बढ़ा।
बाजार प्रतिभागी की इन पर होगी नजर
स्पॉट चांदी 1.2 डॉलर यानी 1.42% गिरकर 83.49 डॉलर प्रति औंस रह गई। HDFC सिक्योरिटीज के वरिष्ठ एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि बाजार प्रतिभागी मध्य पूर्व की घटनाओं, यूरोप, यूके और भारत की मौद्रिक नीति पर निगाह रखेंगे। आर्थिक मोर्चे पर, इस सप्ताह अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल, बेरोज़गारी दर और फेडरल रिजर्व अधिकारियों के भाषणों से कीमती धातुओं के भाव प्रभावित हो सकते हैं।






































