बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने सोमवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के तहत इंपोर्टेड कारों पर सीमा शुल्क (Custom Duty) में कटौती से भारत में लक्जरी कार सेगमेंट के विकास को गति मिल सकती है, जो वर्तमान में काफी कम है। देश के कुल पैसेंजर कार सेगमेंट में लक्जरी कारों की हिस्सेदारी सिर्फ 1 प्रतिशत है। बरार ने एक बयान में कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा, जो व्यापार का विस्तार करेगा, इसके साथ ही टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के आदान-प्रदान को सक्षम बनाकर दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएगा।
भारत में लक्जरी कार बाजार के विस्तार में मिलेगी मदद
हरदीप सिंह बरार ने कहा, "ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के नजरिए से हमें उम्मीद है कि एफटीए में संतुलित और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद प्रावधान शामिल किए जाएंगे, जो लक्जरी कार सेगमेंट में मांग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को मजबूत करने में मदद करेंगे। वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में ये विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।" बरार ने कहा कि अगर पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) पर सीमा शुल्क कम किया जाता है, तो इससे भारत में लक्जरी कार बाजार के विस्तार में मदद मिलेगी।
अभी इंपोर्टेड गाड़ियों पर कितना सीमा शुल्क वसूलती है भारत सरकार
उन्होंने बताया, "हालांकि वर्तमान में हमारी बिक्री में सीबीयू (आयातित इकाइयां) की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन ऐसा ढांचा हमें अपने पोर्टफोलियो को व्यापक बनाने, विश्व स्तर पर लोकप्रिय मॉडल पेश करने और नए उत्पादों का परीक्षण करने की अनुमति देगा। ये भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए वास्तव में फायदे का सौदा होगा।" वर्तमान में, 40,000 डॉलर से कम कीमत वाले आयातित यात्री वाहनों पर 70 प्रतिशत का बुनियादी सीमा शुल्क लगता है, जबकि 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले वाहनों पर प्रभावी सीमा शुल्क 110 प्रतिशत है।



































