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गाड़ी का चालान या टोल टैक्स नहीं चुकाया तो भूल जाइए नेशनल हाइवे का रास्ता! विस्तार से जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jan 22, 2026 12:02 pm IST,  Updated : Jan 22, 2026 12:05 pm IST

भारत में ड्राइविंग करने वाले वाहन मालिकों के लिए जल्द ही बड़ा बदलाव आने वाला है। अगर आपने ई-चालान या टोल टैक्स नहीं भरा है, तो आपको नेशनल हाइवे पर गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं मिल सकती। केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में मोटर व्हीकल एक्ट (MVA) में संशोधन की तैयारी कर रही है।

नए मोटर व्हीकल कानून...- India TV Hindi
नए मोटर व्हीकल कानून में ऐसी गाड़ियों को हाइवे पर नहीं मिलेगी एंट्री? Image Source : ANI

अगर आप अक्सर ई-चालान या टोल टैक्स को नजरअंदाज कर देते हैं, तो अब सतर्क हो जाने का समय है। केंद्र सरकार मोटर व्हीकल कानून में ऐसे बड़े बदलाव की तैयारी में है, जिससे नियम तोड़ने वालों को सीधे सड़क पर ही झटका लग सकता है। प्रस्तावित नियमों के तहत जिन वाहन चालकों पर ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स बकाया होगा, उन्हें नेशनल हाइवे पर गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं मिल सकती है। यह बदलाव संसद के आगामी बजट सत्र में घोषित किए जाने की संभावना है।

लाइव मिंट की एक खबर के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में संशोधन की तैयारी कर रहा है। इसके तहत टोल प्लाजा पर यूजर चार्ज यानी टोल टैक्स से बचने वालों के वाहनों को वहीं रोके जाने का अधिकार प्रवर्तन एजेंसियों को दिया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि देश के करीब 45,428 किलोमीटर लंबे टोल रोड नेटवर्क तक पहुंच सीमित करने से वाहन चालकों में नियमों के पालन की आदत बढ़ेगी।

सड़क सुरक्षा लक्ष्य

सरकार का मकसद सिर्फ सख्ती करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसी को देखते हुए सरकार का लक्ष्य ड्राइविंग बिहेवियर बदलना और कानून के प्रति सम्मान बढ़ाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह संशोधन दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को अनुशासित ड्राइविंग और यूजर फीस चुकाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। यह पहल 2030 तक सड़क हादसों में मौत और चोटों की संख्या आधी करने के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य से भी जुड़ी है।

ई-चालान वसूली चिंता

ई-चालान वसूली की स्थिति भी सरकार के लिए चिंता का विषय है। 2015 से 2025 के बीच करीब 40 करोड़ ई-चालान जारी किए गए, जिनकी कुल रकम लगभग ₹61,000 करोड़ रही, लेकिन इनमें से सिर्फ एक-तिहाई से थोड़ा ज्यादा ही वसूले जा सके। इसी वजह से अब सरकार सख्त और असरदार कदम उठाने पर विचार कर रही है।

सेवाओं पर प्रतिबंध

हाल ही में 20 जनवरी को केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 को अधिसूचित किया है। इसके तहत बकाया टोल टैक्स या जुर्माना नहीं चुकाने पर वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस रिन्यूअल, वाहन का मालिकाना हक बदलने और कमर्शियल वाहनों के नेशनल परमिट जैसी सेवाएं रोकी जा सकती हैं।

ईंधन रोकने पर विचार

प्रस्तावित संशोधनों में यह भी शामिल है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल पर कड़ी जांच होगी और मोटर इंश्योरेंस प्रीमियम को ड्राइविंग व्यवहार से जोड़ा जा सकता है। यहां तक कि भविष्य में ई-चालान या टोल बकाया होने पर पेट्रोल-डीजल न मिलने जैसे ऑप्शन पर भी विचार चल रहा है, हालांकि इसके लिए तकनीकी ढांचे पर अभी चर्चा जारी है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम जरूरी थे, लेकिन इन्हें पारदर्शी और चरणबद्ध तरीके से लागू करना होगा, ताकि आम लोगों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। सही तरीके से लागू होने पर यह योजना न सिर्फ नियमों का पालन बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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