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ITR Refunds: 50 लाख से भी ज्यादा टैक्सपेयर्स कर रहे रिफंड का इंतजार, आखिर कहां फंसा है पेच, क्या करें आप?

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Jan 12, 2026 11:53 am IST, Updated : Jan 12, 2026 11:53 am IST

जानकारों का कहना है कि इसका मुख्य कारण टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा कड़ी जांच है। जानकारों का यह भी कहना है कि रिफंड में देरी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेजज (सीबीडीटी) द्वारा शुरू की गई NUDGE पहल के दूसरे फेज के कारण हो रही है।

लगभग 53 लाख आईटीआर अभी भी प्रोसेसिंग के लिए पेंडिंग हैं।- India TV Paisa
Photo:FREEPIK लगभग 53 लाख आईटीआर अभी भी प्रोसेसिंग के लिए पेंडिंग हैं।

आकलन वर्ष (एसेसमेंट ईयर) 2025-26 में 8 करोड़ से भी ज़्यादा इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर प्रोसेस किए गए, इसके बावजूद, 50 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स को अबतक उनका रिफंड नहीं मिला है। वह अभी भी अपने रिटर्न प्रोसेस होने और रिफंड जारी होने का इंतज़ार कर रहे हैं। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, आयकर विभाग के मौजूदा आंकड़ों से पता चलता है कि 11 जनवरी तक, आकलन वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 8.8 करोड़ आईटीआर फाइल हुए हैं। जिनमें से 8.68 करोड़ रिटर्न पहले ही वेरिफाई हो चुके हैं। साथ ही 8.15 करोड़ रिटर्न प्रोसेस हो चुके हैं। इस तरह, कैलकुलेट करें तो लगभग 53 लाख आईटीआर अभी भी प्रोसेसिंग के लिए पेंडिंग हैं, जिनमें से कई रिफंड क्लेम से जुड़े हैं। आखिर इस साल देरी क्यों हो रही है। क्यों अटके हैं रिफंड, आइए यहां समझते हैं।

जांच पड़ताल कर दी गई है सख्त

खबर के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि इसका मुख्य कारण टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा कड़ी जांच है। रिफंड से जुड़े मामलों में खासकर जांच पड़ताल सख्ती से की जा रही है। उनका कहना है कि आयकर विभाग ने रिस्क-बेस्ड रिव्यू बढ़ा दिए हैं, जिसमें बड़े या असामान्य रिफंड क्लेम वाले रिटर्न को मैनुअल वेरिफिकेशन के लिए फ्लैग किया जा रहा है। ऑटोमेटेड रिस्क फिल्टर और AIS/फॉर्म 26AS के साथ मिसमैच के चलते प्रोसेसिंग में देरी हो रही है और रिवीजन के लिए कहा जा रहा है। जिन रिटर्न में इनकम में मिसमैच, टैक्स क्रेडिट में अंतर, या असामान्य रूप से ज़्यादा रिफंड क्लेम दिख रहे हैं, उन्हें बारीकी से जांच के लिए चुना जा रहा है, जिससे ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग धीमी हो गई है।

NUDGE इनिशिएटिव से वेरिफिकेशन की एक और लेयर जुड़ी

जानकारों का यह भी कहना है कि रिफंड में देरी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेजज (सीबीडीटी) द्वारा शुरू की गई NUDGE पहल के दूसरे फेज के कारण हो रही है। इसमें टैक्स अधिकारी वित्त वर्ष 2024-25 के लिए AEOI (ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ़ इन्फॉर्मेशन) डेटा का इस्तेमाल उन मामलों की पहचान करने के लिए कर रहे हैं, जहां AY 2025-26 के लिए आईटीआर में विदेशी संपत्ति या विदेशी आय का खुलासा नहीं किया गया होगा।

डेडलाइन के करीब ज़्यादा फाइलिंग

देरी के पीछे की एक वजह यह भी है। आकलन वर्ष 2025–26 के लिए आईटीआर की तारीखों की डेडलाइन दो बार बढ़ाई गई। पहले 31 जुलाई से 15 सितंबर तक, और फिर एक और दिन बढ़ाकर 16 सितंबर, 2025 तक किया गया। इससे सितंबर में फाइलिंग की भारी भीड़ हो गई, जिससे प्रोसेसिंग का बैकलॉग बढ़ गया। इसके अलावा, टैक्सपेयर्स द्वारा बताई गई इनकम और बैंकों, एम्प्लॉयर्स और म्यूचुअल फंड्स द्वारा रिपोर्ट किए गए डेटा के बीच अंतर से सिस्टम अलर्ट ट्रिगर हो रहे हैं।

जिनका रिफंड नहीं आया है, उनको क्या करना चाहिए?

जिन लोगों के रिटर्न पहले ही फाइल हो चुके हैं लेकिन अभी तक प्रोसेस नहीं हुए हैं, उनके लिए एक्सपर्ट्स की सलाह यह है कि इनकम टैक्स पोर्टल पर आईटीआर स्टेटस रेगुलर चेक करें। यह सुनिश्चित करें कि बैंक अकाउंट वैलिडेशन पूरा हो गया है। डिपार्टमेंट से आने वाले किसी भी ईमेल या SMS अलर्ट का तुरंत जवाब दें। अगर परमिशन हो, तो डेटा में किसी भी असली गड़बड़ी के मामले में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें।

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