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GST कलेक्शन में जबरदस्त उछाल! फरवरी में 183000 करोड़ के पार, FY26 में 20 लाख करोड़ का आंकड़ा किया क्रॉस

Edited By: Shivendra Singh Published : Mar 01, 2026 03:55 pm IST, Updated : Mar 01, 2026 03:55 pm IST

देश की अर्थव्यवस्था से एक राहत भरी खबर आई है। फरवरी 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले महीने की तुलना में 8.1% ज्यादा है।

GST कलेक्शन में आया उछाल- India TV Paisa
Photo:CANVA GST कलेक्शन में आया उछाल

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है। फरवरी 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले महीने के मुकाबले 8.1% की बढ़त दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 28 फरवरी तक कुल सकल GST राजस्व 20.27 लाख करोड़ रुपये हो चुका है, जो साल-दर-साल आधार पर 8.3% की वृद्धि को दिखाता है।

रिफंड बढ़ा, फिर भी नेट कलेक्शन मजबूत

फरवरी में कुल रिफंड 22,595 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 10.2% ज्यादा है। रिफंड में बढ़ोतरी के बावजूद सरकार का नेट GST राजस्व 1.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो कर संग्रह की मजबूती को दर्शाता है। घरेलू (डोमेस्टिक) राजस्व 1.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 5.3% की बढ़त हुई। वहीं इम्पोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू 47,837 करोड़ रुपये रहा, जो 17.2% की तेज वृद्धि के साथ सबसे ज्यादा उछाल वाला सेगमेंट साबित हुआ। यह संकेत देता है कि विदेशी व्यापार और इम्पोर्ट एक्टिविटी में तेजी बनी हुई है।

सेस कलेक्शन में गिरावट

जहां कुल GST कलेक्शन में मजबूती दिखी, वहीं नेट सेस राजस्व 5,063 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये था। सेस में आई गिरावट नीति-निर्माताओं के लिए विश्लेषण का विषय बन सकती है।

महाराष्ट्र सबसे आगे

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र ने सबसे बड़ा योगदान दिया। प्री-सेटलमेंट आधार पर महाराष्ट्र से 10,286 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा। पोस्ट-सेटलमेंट SGST के आधार पर हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने पॉजिटिव वृद्धि दर्ज की। हालांकि पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में गिरावट देखने को मिली। इससे साफ है कि औद्योगिक और बड़े राज्यों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि कुछ छोटे और पूर्वी राज्यों को दबाव का सामना करना पड़ा।

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