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बंगाल में सरकारी टीचरों की प्राइवेट ट्यूशन पर सख्ती, सरकार ने दिए जांच के आदेश

 Reported By: Onkar Sarkar, Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jun 04, 2026 10:09 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 10:52 pm IST

सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों द्वारा कथित निजी ट्यूशन देने के मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। एनएचआरसी की शिकायत के बाद जिला स्कूल निरीक्षकों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आरोप है कि कुछ शिक्षक छात्रों पर ट्यूशन लेने का दबाव बनाते हैं।

West Bengal Education Department, Private Tuition Ban, Government School Teachers- India TV Hindi
प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने वाले सरकारी टीचरों की खैर नहीं। Image Source : INDIA TV

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और प्रायोजित स्कूलों के शिक्षकों द्वारा कथित रूप से प्राइवेट ट्यूशन देने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिला स्कूल निरीक्षकों यानी कि DI को शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से 4 जून को जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से इस संबंध में एक नोटिस प्राप्त हुआ है।

NHRC ने क्या शिकायत की थी?

NHRC को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ सरकारी स्कूल शिक्षक शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 28 और कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से निजी ट्यूशन पढ़ा रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ टीचर छात्रों को परीक्षा में अंक कम देने या शैक्षणिक मूल्यांकन में नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर अपने यहां ट्यूशन पढ़ने के लिए दबाव बनाते हैं। इससे न केवल छात्रों का शोषण हो रहा है, बल्कि वैध रूप से निजी ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचरों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

इस बारे में नियम क्या कहते हैं?

स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरटीई एक्ट 2009 की धारा 35(2) के तहत राज्य सरकार ने 14 फरवरी 2011 को एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के मुताबिक किसी भी स्कूल में कार्यरत शिक्षक को किसी भी प्रकार की निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण गतिविधि में शामिल होने की इजाजत नहीं है। इसके अलावा, स्कूल शिक्षा विभाग की 8 मार्च 2018 की अधिसूचना में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी शिक्षक निजी लाभ के लिए किसी प्रकार की ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता। हालांकि, स्कूल या संस्थान द्वारा आयोजित अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों में शिक्षक सहयोग कर सकते हैं।

स्कूल निरीक्षकों को दिए गए निर्देश

विकास भवन स्थित स्कूल शिक्षा निदेशालय के प्रशासनिक उपनिदेशक की ओर से जारी आदेश में सभी जिला स्कूल निरीक्षकों (माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा) से कहा गया है कि यदि उनके जिले में इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त हुई है तो उसकी जांच करें और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें। विभाग ने साफ किया है कि शिक्षकों द्वारा आरटीई कानून और न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा तथा जांच में आरोप सही पाए जाने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।

निगरानी बढ़ा सकता है शिक्षा विभाग

इस आदेश के बाद राज्यभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन देने के मामलों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिला स्तर पर होने वाली जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।

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