भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, इन्वेस्टमेंट और इमोशन्स से जुड़ा हुआ अहम हिस्सा है। शादी-ब्याह हो, त्योहार या फिर सुरक्षित इन्वेस्टमेंट सोने की चमक हर घर में खास मानी जाती है। लेकिन ज्वैलरी खरीदते वक्त जब बिल हाथ में आता है, तो GST, मेकिंग चार्जेस, वेस्टेज और अन्य टैक्स देखकर कई लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं। 2026 में भी सोने पर टैक्स के नियम बदले नहीं हैं, लेकिन सही जानकारी न हो तो आपकी जेब पर हजारों रुपये का एक्स्ट्रा बोझ पड़ सकता है।
सोने पर कितना लगता है GST?
भारत में सोने की खरीद पर 3% GST लगाया जाता है। यह दर 24 कैरेट, 22 कैरेट या 18 कैरेट हर तरह के सोने पर समान रहती है। चाहे आप ज्वैलरी खरीदें, गोल्ड कॉइन लें या गोल्ड बार, GST की दर 3% ही होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर 10 ग्राम सोने की कीमत 1 लाख रुपये है, तो उस पर 3000 रुपये GST देना होगा। डिजिटल गोल्ड पर भी 3% GST लगता है, हालांकि सर्विस फीस पर 18% टैक्स लिया जा सकता है। इंपोर्टेड गोल्ड के मामले में 3% IGST के साथ कस्टम ड्यूटी भी देनी पड़ती है।
मेकिंग चार्जेस का क्या है गणित?
मेकिंग चार्जेस वह लागत होती है, जो ज्वैलरी बनाने के लिए ली जाती है। यह आमतौर पर सोने की कीमत का 5% से 25% तक हो सकता है या फिर प्रति ग्राम फिक्स रेट में लिया जाता है। मान लीजिए, सोने की कीमत 50,000 रुपये है और मेकिंग चार्जेस 5000 रुपये हैं। ऐसे में सोने पर 3% GST यानी 1500 रुपये और मेकिंग चार्जेस पर अलग से GST देना पड़ सकता है। कुल मिलाकर टैक्स आपकी उम्मीद से ज्यादा हो सकता है। इसलिए बिल में यह जरूर देखें कि मेकिंग चार्जेस अलग से जोड़े गए हैं या नहीं।
ज्वैलरी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- हॉलमार्क जरूर चेक करें: HUID नंबर वाला सोना ही खरीदें, जिससे शुद्धता की गारंटी मिलती है।
- PAN या आधार जरूरी: 2 लाख रुपये से ज्यादा की खरीद पर पहचान पत्र देना अनिवार्य है।
- वेस्टेज और अन्य चार्जेस पर बातचीत करें: कई ज्वैलर अतिरिक्त चार्ज जोड़ते हैं, जिन पर मोलभाव किया जा सकता है।
- बायबैक पॉलिसी समझें: पुराने सोने को बेचकर नया खरीदने से GST का बोझ कम हो सकता है।
- बिल जरूर लें: टैक्स और चार्जेस की पूरी डिटेल बिल में होना जरूरी है।



































