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AI के डर से IT शेयरों में हाहाकार! फरवरी में LIC को ₹38,000 करोड़ और म्यूचुअल फंड्स को ₹63,000 करोड़ का झटका

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 25, 2026 11:32 pm IST,  Updated : Feb 25, 2026 11:32 pm IST

फरवरी का महीना भारतीय आईटी सेक्टर के लिए किसी तूफान से कम नहीं रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते असर को लेकर बनी आशंकाओं ने टेक शेयरों में ऐसी बिकवाली करवाई कि बड़े-बड़े संस्थागत निवेशकों की दौलत भी पिघल गई।

IT सेक्टर्स में बड़ी...- India TV Hindi
IT सेक्टर्स में बड़ी गिरावट Image Source : CANVA

फरवरी का महीना भारतीय आईटी सेक्टर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और ऑटोमेशन की आशंकाओं ने टेक शेयरों में ऐसी बिकवाली कराई कि निवेशकों की हजारों करोड़ की संपत्ति पिघल गई। महीने भर की गिरावट के बाद 25 फरवरी को थोड़ी राहत जरूर दिखी, लेकिन नुकसान का आंकड़ा चौंकाने वाला है।

21% टूटा निफ्टी IT

निफ्टी IT इंडेक्स फरवरी में अब तक करीब 21% लुढ़क चुका है, जो लगभग 23 साल में सबसे खराब मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है। आईटी कंपनियों का बेंचमार्क इंडेक्स में 10% से ज्यादा वेटेज है, इसलिए इसका असर पूरे बाजार पर पड़ा है। सभी 10 आईटी शेयर 17% से 27% तक टूटे हैं। कोफोर्ज करीब 26.8% गिरकर सबसे बड़ा लूजर बना। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस में भी तेज गिरावट दर्ज हुई।

LIC और म्यूचुअल फंड्स की संपत्ति पर बड़ा असर

आईटी शेयरों में इस गिरावट का सीधा असर संस्थागत निवेशकों पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स को करीब ₹64,000 करोड़ और LIC को लगभग ₹37,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। यानी कुल मिलाकर ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की वैल्यू इरेज हो गई। इंफोसिस सबसे बड़ा वेल्थ डिस्ट्रॉयर साबित हुआ। इस एक शेयर ने म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो से करीब ₹26,000 करोड़ साफ कर दिए। वहीं TCS की गिरावट से भी ₹9,000 करोड़ से ज्यादा का झटका लगा। विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा ने भी बड़ी संपत्ति मिटाई।

आखिर क्यों टूट रहे हैं IT शेयर?

करीब 300 अरब डॉलर के भारतीय आईटी सर्विस सेक्टर पर सबसे बड़ा डर यह है कि AI प्रोजेक्ट टाइमलाइन घटा सकता है, डील फ्लो प्रभावित कर सकता है और लेबर-इंटेंसिव मॉडल पर चोट कर सकता है। अमेरिकी कंपनियों के नए AI टूल्स ने ऑटोमेशन की रफ्तार बढ़ाई है। साथ ही, अमेरिका और यूरोप की सुस्त आर्थिक ग्रोथ, फेड रेट कट में देरी और आईटी बजट में सतर्कता ने भी दबाव बढ़ाया है। कुछ ब्रोकरेज का मानना है कि अगर AI एप्लिकेशन सर्विसेज की कमाई में सेंध लगाता है, तो आने वाले 3-4 साल में राजस्व ग्रोथ पर सालाना 2% तक असर पड़ सकता है।

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