नए साल की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीदों से भरी मानी जा रही थी, लेकिन जनवरी का महीना आते ही तस्वीर कुछ बदली-बदली नजर आने लगी। ग्लोबल संकेतों की अनिश्चितता और जोखिम से दूरी के माहौल के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से कदम पीछे खींच लिए। इसका सीधा असर बाजार की चाल पर दिखा, जहां उतार-चढ़ाव बढ़ा और निवेशकों की चिंता भी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय पूंजी बाजार से करीब 27,454 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा इक्विटी से निकासी का है। अकेले शेयर बाजार से एफपीआई ने 33,518 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है। शुद्ध बिकवाली का मतलब साफ है कि विदेशी निवेशकों ने जितनी खरीद की, उससे कहीं ज्यादा शेयर बेच दिए।
इक्विटी से दूरी, लेकिन पूरी तरह गायब नहीं
हालांकि विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकाला, लेकिन वे पूरी तरह भारतीय बाजार से बाहर नहीं हुए हैं। जनवरी में एफपीआई ने डेट सेगमेंट में 5,538 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके अलावा हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट्स में 23.68 करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड में करीब 626 करोड़ रुपये लगाए गए। इसका मतलब साफ है कि विदेशी निवेशक अभी शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से दूर रहना चाहते हैं, लेकिन डेट और दूसरे सुरक्षित निवेश विकल्पों में वे अभी भी पैसा लगाए हुए हैं।
पिछले महीनों का ट्रेंड भी चिंताजनक
जनवरी की यह बिकवाली कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं है। दिसंबर 2025 में भी एफपीआई ने भारतीय बाजार से 38,721 करोड़ रुपये की निकासी की थी। अगर पूरे पिछले साल की बात करें, तो विदेशी निवेशकों ने कुल मिलाकर 83,972 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह आंकड़े दिखाते हैं कि बीते कुछ समय से विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय इक्विटी बाजार को लेकर सतर्क बना हुआ है।
बाजार के लिए क्या संकेत?
लगातार हो रही विदेशी बिकवाली से शेयर बाजार पर दबाव बनना स्वाभाविक है। बड़े स्तर पर इक्विटी से पैसा निकलने से इंडेक्स की मजबूती कमजोर पड़ती है और निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता है। हालांकि डेट और म्यूचुअल फंड में सीमित निवेश यह संकेत देता है कि भारत को लेकर भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।



































