1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट में सैलरी पाने वाले वर्ग के लिए क्या खास होगा, यही हर किसी के मन में चल रहा है। जानकारों को उम्मीद है कि बजट 2026 पुराने व्यक्तिगत आयकर रेजिम को अचानक या पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, लेकिन सरकार नए टैक्स रेजिम को और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठा सकती है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के मुताबिक, यह एक धीमी लेकिन स्पष्ट नीतिगत बदलाव की ओर इशारा है, जिसका मकसद करदाताओं को स्वेच्छा से नए रेजिम की ओर ले जाना है।
नए रेजिम को प्रोत्साहित कर सकती है सरकार
NDTV की खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार का रुख साफ है-पुराने रेजिम को जबरदस्ती खत्म करने के बजाय, नए रेजिम में प्रोत्साहन देकर करदाताओं को आकर्षित करना। यह रणनीति अचानक बड़े बदलावों से बचते हुए धीरे-धीरे संक्रमण सुनिश्चित करती है। संभावित प्रोत्साहन जो बजट में आ सकते हैं, उनमें स्टैंडर्ड डिडक्शन में और बढ़ोतरी (विशेष रूप से नए रेजिम में)
विवाहित जोड़ों के लिए वैकल्पिक संयुक्त टैक्स फाइलिंग (जॉइंट फाइलिंग) का विकल्प हो सकता है। कुछ आवश्यक खर्चों जैसे मेडिकल खर्च, विकलांगता देखभाल या अन्य चुनिंदा मदों के लिए सीमित कटौतियां बहाल करना आदि हो सकता है।
मौजूदा स्थिति में अंतर साफ
बजट 2025 में नए रेजिम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया था। इससे सैलरीड क्लास के लिए टैक्स-फ्री इनकम की सीमा प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक पहुंच गई है। जानकार मानते हैं कि आगे किसी भी तरह की अतिरिक्त बढ़ोतरी सिर्फ नए रेजिम में ही लागू होगी, जिससे पुराने और नए रेजिम के बीच का अंतर और गहरा हो जाएगा। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए, स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि सैलरीभोगी परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
रणनीति की सफलता बयां करते हैं सरकारी आंकड़े
वित्त वर्ष 2023-24 में 72% करदाता (लगभग 5.27 करोड़) ने नए टैक्स रेजिम को चुना। अनुमान है कि आयकर वर्ष 2025-26 में यह संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि स्लैब रेशनलाइजेशन, रिबेट्स और अन्य लाभ मिडिल क्लास के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। फिर भी, करीब 28% करदाता (लगभग 2 करोड़) अभी पुराने रेजिम में बने हुए हैं। इसका मुख्य कारण-HRA, हेल्थ इंश्योरेंस (80D), होम लोन ब्याज, एजुकेशन लोन और अन्य कटौतियां, जो पुराने रेजिम में उपलब्ध हैं।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में बड़े उलट-पलट की बजाय नए रेजिम को मजबूत करने पर फोकस रहने की संभावना है। यह बदलाव सैलरीड क्लास को ज्यादा राहत देने और टैक्स सिस्टम को सरल और आकर्षक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।






































