कंप्यूटिंग पावर के लिए डेटा सेंटर की जरूरत होती है तो बजट में इस पर खासा फोकस रहने की जरूरत है जिससे एआई को कंप्यूटिंग पावर का पूरा फायदा मिले और देश का तकनीकी जगत फले-फूले।
1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश होने वाला है। बजट में स्मार्टफोन की कीमतों को लेकर भी लोगों की नजर रहेंगी। ग्लोबल चिप शॉर्टेज की वजह से फोन बनाने वाली कंपनियां काफी प्रेशर में हैं। इंडस्ट्री की नजर अपकमिंग बजट की घोषणाओं पर है।
भारत का आर्थिक सर्वेक्षण एक तरह से अर्थव्यवस्था की स्थिति का सालाना रिपोर्ट कार्ड है। इसमें सरकार की आर्थिक नीतियों का आकलन होता है। आगे के सुधारों के सुझाव दिए जाते हैं।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा ने बताया कि जीएसटी सुधारों के बाद पेट्रोल कारों की कीमतों में कमी आई है, जिससे शुरुआती स्तर की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ गया है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए टैक्स-फ्री छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना चाहिए।
भारत में UPI जितना तेजी से बढ़ा है, उतना ही कमजोर इसका कमाई मॉडल रहा है। सरकार की जीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) पॉलिसी ने डिजिटल पेमेंट को हर गली-मोहल्ले तक पहुंचाया, लेकिन हर UPI ट्रांजैक्शन पर करीब 2 रुपये का खर्च बैंकों और फिनटेक कंपनियों को खुद उठाना पड़ रहा है।
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 के तहत लगाए जाने वाले ओआईडी उपकर को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद 1 मार्च, 2016 से विशिष्ट दर के बजाय 20 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क में बदल दिया गया था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 11.21 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा था।
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी बजट 2026 में सामने आ सकती है। लंबे समय से कर्मचारियों की ओर से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग उठ रही है और अब संकेत मिल रहे हैं कि इस बार बजट में इसे बढ़ाने का ऐलान किया जा सकता है।
सामान्य दिनों में शेयर बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इस साल बजट के दिन यानी 1 फरवरी को रविवार है। इसको देखते हुए बीएसई और एनएसई ने निवेशकों और एक्सचेंज के ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए एक खास सर्कुलर जारी किया है।
जब भी देश के आम बजट का जिक्र होता है, तो लोगों की नजर टैक्स, महंगाई, सब्सिडी और सरकारी स्कीम पर टिक जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला बजट कब पेश किया गया था और उस दौर में देश की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
यूनियन बजट 2026 से पहले देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। बीते कुछ सालों से सरकार का साफ संदेश रहा है कि मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स की जेब में ज्यादा पैसा बचे, ताकि खपत बढ़े और इकोनॉमी को रफ्तार मिले।
बजट प्रिंटिंग की अंतिम और सबसे गोपनीय चरण की शुरुआत पारंपरिक ‘हलवा’ समारोह से होती है। यह समारोह अगले सप्ताह (जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में) होने की संभावना है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 कृषि को केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के बजाय आर्थिक विकास के मजबूत इंजन के रूप में स्थापित करने का एक खास मौका है।
बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे देश के क्रिप्टो निवेशकों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। बीते कुछ सालों से भारी टैक्सेशन और सख्त नियमों के बीच फंसा भारतीय क्रिप्टो सेक्टर अब सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है।
यूनियन बजट 2026 से पहले देशभर के टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हुई हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट से एक बार फिर उम्मीद की जा रही है कि सरकार आम आदमी को टैक्स के मोर्चे पर राहत दे सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रतिबद्धता की ओर इशारा करते हुए रमन ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कुछ हफ्तों में पेश किया जाने वाला नया बजट इसी तर्ज पर होगा।
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