IT & Tech Budget 2026: पिछले कुछ सालों में भारत में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि रोजाना के कामों तक आ पहुंचा है। देश में डेटा सेंटर उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बन रहे हैं और देश में सेमीकंडक्टर का निर्माण होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है जिसके दम पर कहा जा सकता है कि भारत में तकनीकी मामलों में बड़ा डेवलपमेंट हो रहा है। इसको बजट 2026 से किस तरह की मदद मिल सकती है, इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तकनीकी जगत के एक्सपर्ट्स के साथ मंथन कर रहीं होंगी या कर चुकी होंगी। बजट में इसके आधार पर अच्छे और प्रेक्टिकल ऐलानों की उम्मीद की जा सकती है।
एआई और भारत
भारत के एआई बाजार ने 2025 में 22.85 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया है और पूर्वानुमानों के मुताबिक 2033 तक 38 फीसदी से ज्यादा सीएजीआर की विकास दर रहेगी। डेलाइट का अनुमान है कि एआई अगले 10 सालों में ग्लोबल इकोनॉमी में 17-26 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दे सकता है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत प्रेक्टिकल रूप से उस वैल्यू का 10-15 फीसदी हिस्सा हासिल कर सकता है और इसीलिए बजट 2026 काफी अहम है। यह तय करेगा कि भारत की एआई में आगे बढ़ने और इससे रेवेन्यू कमाने के अलावा टेक जगत में फायदा उठाने में कितना सफल रहता है।
बजट 2026 और एआई
बदले हुए सिनेरियो में अब पूंजी समस्या नहीं है बल्कि एक्जीक्यूशन को लेकर दिक्कतें हैं। भारत के डेटा सेंटर और एआई की कहानी अब 'क्या पैसा आएगा' से आगे बढ़ चुकी हैऔर बजट 2026 ठीक इसी में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। एआई को कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है और कंप्यूटिंग पावर के लिए डेटा सेंटर की जरूरत होती है। डेटा सेंटर के लिए चिप्स की जरूरत होती है और चिप्स के लिए कैपिटल और पॉलिसी सपोर्ट की जरूरत होती है। एक भी कड़ी टूट जाए तो पूरी चेन धीमी पड़ जाती है।
सबके केंद्र में इंडिया एआई मिशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक बजट 2026 इंडिया एआई के लिए फंडिंग बढ़ा सकता है जिसमें 18,000-30,000 जीपीयू वाले एआई सिस्टम की योजनाएं भी शामिल हैं। इससे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए कंप्यूटिंग की कमी दूर हो सकती है। एजूकेशन और हेल्थ सर्विसेज पर बेस्ड नए नेशनल एआई सेंटर की भी चर्चा है जहां एआई को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।डेलाइट के मुताबिक बजट 2026 यहीं पर अपनी भूमिका निभा सकता है, जिसमें प्रेक्टिकल एआई ट्रेनिंग, डेटा सेंटर अप्रेंटिसशिप और पब्लिक-प्राइवेट ट्रेनिंग को शुरुआती चरण से शुरू करके यूनिवर्सिटी के माध्यम से विस्तार करने का काम किया जा सकता है।
EY ने एक सुझाव दिया है कि पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम को एआई, स्पेस और रोबोटिक्स तक एक्सपेंड करना चाहिए। अगर पीएलआई इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सफल रहा तो यह डीप टेक में भी निजी निवेश आकर्षित करने में मदद कर सकता है।
बजट 2026 और डेटा सेंटर
भारत का डेटा सेंटर बाजार एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के अनुमान के मुताबिक यह बाजार 2023 में 4.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2032 तक 11.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ये आंकड़े असरदार लगते हैं। लेकिन अब खास यह है कि यह क्षमता वास्तव में कितनी तेजी से ऑनलाइन मुहैया होती है।
डेटा सेंटर क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस और टैक्स छूट मिलना काफी जरूरी है। डेटा सेंटरों के लिए भारी शुरुआती खर्च की जरूरत होती है जैसे कि जमीन बिजली, कूलिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सर्वर। डीपीडीपी एक्ट कंपनियों को भारत में डेटा कलेक्शन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ऐसे में डेलॉयट का कहना है कि लॉन्गटर्म प्रोजेक्ट्स को प्रेक्टिकल और रियलिस्टिक बनाने के लिए टैक्स छूट और इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस जरूरी है।
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