अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें ग्रीनलैंड पर टेढ़ी हैं तो दूसरी तरफ फ्रांस, इटली और जर्मनी, रूस से करीबी बढ़ाने का संकेत देने लगे हैं। सोचिए अगर विश्व की सबसे ताकतवर सेना वाला अमेरिका एक तरफ हो और दूसरी ओर हो एक असंभव-सा दिखने वाला गठबंधन रूस और यूरोप का, जिसमें अमेरिका और तुर्की को छोड़कर NATO के सारे देश हों, तो ऐसे में किसका पलड़ा भारी होगा? कहीं अरबों डॉलर वाला डिफेंस बजट निर्णय करेगा, तो कहीं टैंकों की संख्या और आकाश में उड़ते फाइटर जेट्स खेल पलटेंगे। जानिए क्या यूरोप के तमाम देश मिलकर भी अमेरिका का मुकाबला कर पाएंगे।
डिफेंस बजट में अमेरिका के आगे कोई नहीं टिकता
इस तुलना में अमेरिका वो किरदार है, जिसकी जेब में सबसे ज्यादा वजन है। अमेरिका का अकेले का डिफेंस बजट 935 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। इतना कि वह पूरे यूरोप और रूस के कुल डिफेंस बजट को भी पीछे छोड़ देता है। रूस ने 2024 में अपना सैन्य बजट तेजी से बढ़ाया, फिर भी यह गठबंधन अमेरिका के डिफेंस बजट का लगभग 65–70 फीसदी ही टच कर पाता है।
सैनिक-टैंक के मामले में आगे हैं रूस और यूरोप
ये तुलना जब जमीन पर उतरती है तो रूस और बाकी यूरोप का गठबंधन भारी पड़ता दिखता है। रूस के पास अकेले 13 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं। उसके पास विश्व का सबसे बड़ा टैंक भंडार है। भले ही उनमें कई पुराने मॉडल के हैं। यूरोप इसमें अपने करीब 18 लाख एक्टिव सैनिक जोड़ता है। यदि यूरेशिया की जमीन धरती पर आमने-सामने की जंग हो, तो रूस-यूरोप के 31 लाख सैनिकों के सामने अमेरिका के करीब 13 लाख सैनिक होंगे। वहीं, रूस के गठबंधन के पास करीब 14 हजार टैंक हैं और अमेरिका के पास यह करीब 4 हजार 600 हैं।
| फीचर | अमेरिका | रूस + NATO (अमेरिका और तुर्की के बिना) | डेटा सोर्स |
| आर्मी ग्लोबल रैंक | अमेरिका- 1 | रूस- 2, ब्रिटेन- 6, फ्रांस- 7 | Global Firepower 2025 |
| डिफेंस बजट | 935-997 बिलियन डॉलर | 635 बिलियन डॉलर | NATO SG Report 2024 / SIPRI |
| सक्रिय सैनिक | 13 लाख | 31 लाख | IISS / Global Firepower |
| कुल एयरक्राफ्ट | 13,200 | 7,700 | Global Firepower 2025 |
| फाइटर/इंटरसेप्टर | 1,850 | 1,500 | IISS Military Balance |
| न्यूक्लियर वॉरहेड्स | 5,044 | 6,250 | SIPRI / IISS |
| मेन बैटल टैंक | 4,600 | 14,000 | IISS / Global Firepower |
| अटैक सबमरीन | 64 (सभी न्यूक्लियर) | 120 (न्यूक्लियर+डीजल) | IISS Military Balance |
| एयरक्राफ्ट कैरियर | 11 | 1 रूस, 2 ब्रिटेन, 1 फ्रांस, 2 इटली | IISS Military Balance |
आसमानी जंग में अमेरिका की बादशाहत
लेकिन युद्ध जैसे ही आसमान की तरफ जाता है तो कहानी पलट जाती है। अमेरिका के पास 5Th जेनरेशन के सैकड़ों स्टील्थ फाइटर जेट्स हैं। इनमें F-22 और F-35 भी शामिल हैं। वहीं, रूस के पास खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इसके अलावा, यूरोप अभी भी अधिकतर 4.5 जेनरेशन फाइटर्स पर डिपेंड है। अमेरिका के पास कुल एयरक्राफ्ट 13,200 हैं, जबकि यूरोप और रूस के गठबंधन के पास महज 7,700 ही हैं।
समुद्रों की लड़ाई में कौन मारेगा बाजी?
समुद्र में जंग हुई तो भी उसमें अमेरिका का दबदबा रह सकता है क्योंकि उसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जो उसे विश्व के किसी भी कोने में लड़ाई लड़ने की ताकत देते हैं। अमेरिका के पास 64 न्यूक्लियर सबमरीन भी हैं। वहीं, रूस-यूरोप के गठबंधन के पास ये 120 हैं। लेकिन इसमें न्यूक्लियर और डीजल वाली सबमरीन मिक्स हैं। इनके पास कुल 6 एयरक्राफ्ट कैरियर ही हैं।
परमाणु हथियारों की तुलना में यूरोप-रूस आगे
बात जब परमाणु हथियारों पर आती है, तो कहानी बहुत ज्यादा डरावनी हो जाती है। दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रूस के पास है। ब्रिटेन और फ्रांस को जोड़ दें तो रूस के गठबंधन के पास 6,000 से ज्यादा न्यूक्लियर वॉरहेड्स हो जाते हैं। वहीं, अमेरिका के पास ये 5 हजार 44 के करीब हैं। यह वो मोड़ है जहां जीत-हार का प्रश्न ही खत्म हो जाता है।
लेकिन आर्मी और हथियारों की तुलना करके तय करना कि युद्ध के मैदान में कौन जीत सकता है तो ये कहना बड़ा मुश्किल होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अनिश्चितता के इस दौर में देशों के संबंध लगातार बन बिगड़ रहे हैं। रूस और यूरोप साथ आएं तो यह अविश्वसनीय घटना होगी क्योंकि अभी तो सिर्फ यूरोप के नेताओं और पुतिन की तरफ से सिर्फ बयानबाजी हो रही है। युद्ध होगा भी या नहीं नहीं, इसकी कोई सूचना नहीं है।
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