Monday, March 02, 2026
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Safe Holi for Kids: रंगों के बीच बच्चों की आंख, नाक और सेहत का रखें ख्याल, ENT स्पेशलिस्ट ने बताईं जरूरी गाइडलाइंस

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam Published : Mar 02, 2026 07:52 pm IST, Updated : Mar 02, 2026 07:52 pm IST

होली के दौरान इस्तेमाल होने वाले केमिकल युक्त रंग, गंदा पानी, उड़ती धूल, तेज़ आवाज़ और मौसम में अचानक बदलाव बच्चों के संवेदनशील कान, नाक और गले पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

होली के रंगों से बच्चे को कैसे बचाएं- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK होली के रंगों से बच्चे को कैसे बचाएं

होली का त्योहार बच्चों के लिए साल का सबसे खुशियों से भरा दिन होता है। पानी के गुब्बारे, पिचकारी, रंग, म्यूज़िक ये सब मिलकर इस त्योहार को खास बनाते हैं। हालांकि, जिन बच्चों को कान, नाक और गले से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके लिए यह दिन कुछ सावधानियों की मांग करता है। जयपुर स्थित Narayana Hospital में सीनियर कंसल्टेंट,  ENT और हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी Dr. Deepanshu Gurnani के अनुसार, जिन बच्चों के कान में ग्रोमेट (वेंटिलेशन ट्यूब) लगे हैं, जिन्हें बार-बार कान में इन्फेक्शन होता है या जिनकी हाल ही में टॉन्सिल या गले की सर्जरी हुई है, उनको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

क्यों बढ़ जाता है ENT का खतरा?

होली के दौरान रंगीन पानी के छींटे या पिचकारी का पानी कान के भीतर जा सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों को पानी वाले खेल से दूर रखना बेहतर होता है। यदि वे खेल रहे हों, तो उन्हें सॉफ्ट सिलिकॉन इयरप्लग या अच्छी तरह फिट होने वाली स्विम कैप पहनाई जा सकती है। खेलने के बाद केवल बाहरी कान को मुलायम तौलिए से हल्के हाथ से सुखाना चाहिए और कॉटन बड्स को कान के अंदर डालने से बचना चाहिए। यदि होली के बाद कान से पानी या पस निकलने लगे, तेज दर्द हो या बुखार आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों के लिए विशेष सावधानी

  • कान में इन्फेक्शन: जिन बच्चों को बार-बार कान में इन्फेक्शन होता है, उनके लिए सावधानी बेहद जरूरी है। कान के पास गुब्बारा फूटने या तेज़ पानी के प्रेशर से परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए बच्चों को सिर के स्तर पर निशाना लगाने से रोकना चाहिए। खेलने के बाद हल्के गुनगुने पानी से नहलाना और यदि बच्चा सुनने में कमी या कान भरे होने की शिकायत करे तो तुरंत जांच कराना आवश्यक है।

  • तेज़ लाउडस्पीकर: तेज़ लाउडस्पीकर और पटाखों की आवाज़ भी बच्चों के कानों को प्रभावित कर सकती है, खासकर अगर वे पहले से संवेदनशील हों। ऐसे में बच्चों को स्पीकर से दूर रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर इयरमफ्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • गले का ख्याल: टॉन्सिल सर्जरी के बाद लगभग दो सप्ताह तक गला काफी नाजुक रहता है। होली के दौरान लगातार चिल्लाना, गाना या मसालेदार और तला हुआ भोजन करना गले की तकलीफ बढ़ा सकता है। ऐसे में बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाना चाहिए, सॉफ्ट और सादा भोजन देना चाहिए और बहुत ठंडी या कृत्रिम रंग वाली ड्रिंक्स से बचाना चाहिए। यदि निगलने में दिक्कत, तेज दर्द या मुंह से खून आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।

  • एलर्जी या साइनस: एलर्जी या साइनस की समस्या वाले बच्चों के लिए सूखे रंग खास तौर पर परेशानी पैदा कर सकते हैं। हवा में उड़ते पाउडर से छींक, नाक बंद होना और सिरदर्द बढ़ सकता है। नाक के आसपास पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाने से पाउडर का सीधा संपर्क कम किया जा सकता है। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर हल्का मास्क पहनाना भी फायदेमंद होता है। घर लौटने के बाद सलाइन नेज़ल रिंस से नाक की सफाई करना और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से जारी रखना चाहिए।

किन रंगों का करें चयन

  • हर्बल या सर्टिफाइड स्किन-सेफ रंगों का ही चयन करना चाहिए और सिंथेटिक पाउडर से बचना चाहिए।

  • संभव हो तो पानी वाली होली के बजाय सूखी होली खेलना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

  • बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाना और सुरक्षित, परिचित माहौल में खेलने देना भी जरूरी है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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