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Explainer: मिडल-ईस्ट में तनाव बढ़ा, जानें कहां तक पहुंच सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें, सोने-चांदी पर क्या पड़ेगा असर

Written By: Sunil Chaurasia Published : Mar 01, 2026 11:17 am IST, Updated : Mar 01, 2026 01:44 pm IST

भारत अपनी जरूरत के 90 प्रतिशत कच्चे तेल को दूसरे देशों से आयात करता है और इनमें से करीब आधा तेल खाड़ी देशों से ही आता है।

मिडल-ईस्ट में बढ़ते...- India TV Hindi
Image Source : AFP मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारत पर क्या पड़ेगा असर

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद मिडल-ईस्ट में जबरदस्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ कतर, कुवैत, बहरीन, यूएई समेत कई खाड़ी देशों पर मिसाइलें दाग दीं। मिडल-ईस्ट में बढ़ रहे इस तनाव ने दुनियाभर के बाजारों की टेंशन बढ़ा दी है, क्योंकि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अब इस जंग के लंबे समय तक चलने की संभावना जताई जा रही है। मिडल-ईस्ट में तेजी से बढ़ रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 8% तक की तेजी का अनुमान

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर और जाने-माने कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने इंडिया टीवी को बताया कि सोमवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें वॉर प्रीमियम पर 8 प्रतिशत तक चढ़ सकती हैं। बताते चलें कि शुक्रवार को MCX पर 19 मार्च की डिलीवरी वाला कच्चा तेल 6100 रुपये के भाव पर बंद हुआ था। अगर इसमें 8 प्रतिशत की अनुमानित तेजी को जोड़ा जाए तो सोमवार को कच्चे तेल के भाव 6588 रुपये तक पहुंच सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की मौजूदा कीमतें 67.02 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 74.24 डॉलर प्रति बैरल है। oilprice.com के मुताबिक, WTI Crude की मौजूदा कीमत 67.02 डॉलर (+2.78%) प्रति बैरल, Brent Crude 72.84 डॉलर (+2.78%) प्रति बैरल Murban Crude 74.24 डॉलर (+4.05%) प्रति बैरल है।

फरवरी में पहले ही 8% महंगा हो चुका है तेल

फरवरी में Brent Crude की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की तेजी पहले ही आ चुकी है, ऐसे में इसके दाम में संभावित 8 प्रतिशत की ताजा तेजी अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। इतना ही नहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इजरायल-ईरान के बीच जारी तनाव लंबा चलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक की भी बढ़ोतरी हो सकती है। अजय केडिया ने बताया कि लंबे समय तक स्थिति तनावपूर्ण बने रहने की स्थिति में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच सकता है, जो भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारत पर क्या पड़ेगा असर

मिडल-ईस्ट में बढ़ता तनाव यूं तो पूरी दुनिया के लिए काफी नुकसानदायक साबित होगा, लेकिन भारत पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत के 90 प्रतिशत कच्चे तेल को दूसरे देशों से आयात करता है और इनमें से करीब आधा तेल खाड़ी देशों से ही आता है। इसके अलावा, ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz भी ईरान के कंट्रोल में है, जिसे ईरान ने बंद कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की पूरी संभावना है, क्योंकि दुनियाभर का 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

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Image Source : FREEPIKलगभग 6000 चीजों को बनाने में इस्तेमाल होता है कच्चा तेल

लगभग 6000 चीजों को बनाने में इस्तेमाल होता है कच्चा तेल

लगभग 6000 चीजों को बनाने में कच्चे तेल को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली लगभग 90 प्रतिशत चीजों में किसी न किसी रूप में कच्चे तेल का इस्तेमाल हुआ होता है।

कच्चे तेल से क्या-क्या चीजें बनती हैं

कच्चे तेल का लगभग 70 से 80% हिस्सा पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, एलपीजी, केरोसिन जैसे ईंधन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, प्लास्टिक, पॉलिएस्टर, नायलॉन, सिंथेटिक लेदर, अस्पताल में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे- सिरिंज, दस्ताने, हार्ट वाल्व, कृत्रिम अंग बनाने में भी कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स जैसे- लिपस्टिक, काजल, फाउंडेशन, नेल पॉलिश, शैम्पू, शेविंग क्रीम, वैसलीन में इसका इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, डामर, फर्नेस ऑयल, लुब्रिकेंट्स बनाने में भी कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।

अब इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि कच्चा तेल महंगा होने पर क्या-क्या चीजें महंगी होंगी। जाहिर-सी बात है कि जब कच्चा तेल महंगा होने की वजह से एक साथ इतनी सारी चीजों के दाम बढ़ेंगे तो महंगाई अपने-आप तेजी से बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा। 

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Image Source : FREEPIKसोना-चांदी की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर

सोना-चांदी की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर

दुनिया के किसी भी हिस्से में जब युद्ध की स्थिति पैदा होती है तो निवेशक शेयर बाजारों से अपना पैसा निकालकर सोने और चांदी में लगाते हैं। दरअसल, सोने को दुनिया का सबसे पुराना और सबसे भरोसेमंद 'सेफ हेवन' संपत्ति माना जाता है। युद्ध की वजह से निवेशक शेयर बाजार में जोखिम लेने से बचते हैं और वे अपना पैसा ऐसी जगह पर लगाना चाहते हैं, जहां वो सुरक्षित रहें। ऐसे में सोना और चांदी ही निवेश के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में महंगाई बढ़ने पर करेंसी की वैल्यू भी गिर जाती है। लेकिन, सोने-चांदी के मामले में ये बिल्कुल अलग है। सोने और चांदी की कीमतें महंगाई के साथ-साथ बढ़ती हैं।

अजय केडिया ने बताया कि सोमवार को जब MCX पर कारोबार की शुरुआत होगी तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में सोने के भाव में 5 प्रतिशत और चांदी के भाव में 7 से 8 प्रतिशत तक की जोरदार तेजी देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि माहौल में जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें 110 डॉलर के पार भी पहुंच सकती हैं।

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