Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान दशकों से जिस गड्ढे को दूसरों के लिए खोद रहा था, आज वह उसी में गिर गया है। पाकिस्तान, जिस अफगानिस्तान को अपनी 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' समझता था, आज वही उसका दुश्मन बन गया है। नौबत यह है कि 'एटम बम' की गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान को अब तालिबान की तरफ से 'ह्यूमन बम' की चेतावनी दी जा रही है। आखिर काबुल पर तालिबान के कब्जे का जश्न मनाने वाले पाकिस्तान से बीते 4 साल में ऐसी क्या चूक कर दी कि अब उसे खून-खराबा करना और झेलना पड़ रहा है? अफगानिस्तान के लोगों में पाकिस्तान के प्रति इतनी नफरत क्यों है? और सबसे अहम सवाल- भारत के लिए, पाकिस्तान का जंग की इस आग में झुलसना कितना फायदेमंद है? इन तमाम ज्वलंत सवालों के जवाब जानने के लिए INDIA TV ने एक्सक्लूसिव बातचीत की स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट, अफगानिस्तान में भारत के पूर्व डिफेंस अटैशे (Defence Attache) और भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन से। पढ़िए पाकिस्तान-अफगानिस्तान के डूरंड लाइन के ऐतिहासिक विवाद, भारत-अफगानिस्तान दोस्ती और पाकिस्तान की चूक पर खास बातचीत।
सवाल- अपने ही खोदे गड्ढे में कैसे गिर गया है पाकिस्तान? ऐसी नौबत क्यों आई कि जिस अफगानिस्तान को वो अपनी 'स्ट्रेटेजिक डेप्थ' बोलता था, अब उससे उसको खून-खराबा करना पड़ रहा है?
जवाब- रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन के मुताबिक, इसके कई कारण और कुछ जमीनी हकीकतें हैं। जब से पाकिस्तान बना है, तब से लेकर आज तक अफगानी लोग पाकिस्तान से सबसे ज्यादा नफरत करते हैं और भारत को सबसे पक्का दोस्त मानते हैं। इसके मुख्य कारण ये हैं-
- डूरंड लाइन- 1893 में ब्रिटिश राज ने पश्तूनों को बांटकर डूरंड लाइन बनाई थी। आज तक किसी भी अफगान सरकार या जनता ने इसे मान्यता नहीं दी है।
- ऐतिहासिक जुड़ाव- आजादी की लड़ाई के समय पश्तून, जैसे- खान अब्दुल गफ्फार खान यानी फ्रंटियर गांधी, भारत और इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ खड़े थे। वे मोहम्मद अली जिन्ना के धर्म के नाम पर देश बनाने के एजेंडे के खिलाफ थे।
- आर्थिक शोषण- अफगानिस्तान एक लैंडलॉक देश है। पाकिस्तान ने हमेशा इसका फायदा उठाया है। वह वहां के ताजे फल सस्ते में लेकर अपने नाम से एक्सपोर्ट करता है और बदले में अफगानिस्तान को मिलावट वाली घटिया दवाइयां भेजता है।
संजय मेस्टन ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा धर्म और 'जिहाद' के नाम पर अफगानों को गुमराह किया है। सोवियत युद्ध के समय जनरल जिया-उल-हक ने अमेरिका के पैसों से वहां मदरसे खोले और उन्हें लड़ने के लिए इस्तेमाल किया। 1996 में पाकिस्तान ने ही तालिबान को बनाया और 2001 के 9/11 हमले के बाद उन्हें अपने यहां शरण दी। उनका मकसद हमेशा अफगानिस्तान को कमजोर और आपस में लड़ाकर रखना था ताकि वे कभी एकजुट होकर 'ग्रेटर पश्तूनिस्तान' की मांग न कर सकें।
सवाल- 2021 में जब तालिबान सत्ता में आया तो पाकिस्तान में जश्न मनाया गया था। लेकिन पिछले 4 साल में पाकिस्तान ने ऐसी क्या गलती कर दी कि आज जंग की यह नौबत आ गई?
जवाब- रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन ने कहा कि जब अफगान तालिबान को वापस सत्ता मिली, तो उन्हें यह एहसास हो गया कि पाकिस्तान की सेना और ISI ने उनका इस्तेमाल किया है। उन्हें समझ आ गया कि पाकिस्तान ने अपने फायदे के लिए उन्हें पीछे धकेल दिया है। लेकिन अफगान भी चालाक हैं, उन्होंने जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान से शरण और ट्रेनिंग ली, लेकिन अब वे जाग गए हैं।
उन्होंने तय कर लिया है कि वे अब पाकिस्तान के इशारों पर नहीं नाचेंगे। जब उन्होंने पाकिस्तान की बात माननी बंद कर दी, तो पाकिस्तान ने उन्हें तंग करना शुरू कर दिया- जैसे चीन का प्रेशर बनाना, ट्रेड बॉर्डर- खैबर पास और स्पिन बोल्डक बंद कर देना, ट्रकों को रोक देना और भारी ट्रांजिट फीस लगाना।
सवाल- एक तालिबानी अधिकारी ने कहा कि अगर पाकिस्तान के पास एटम बम है, तो हमारे पास 'ह्यूमन बम' हैं। इस बयान के आधार पर समझें तो पाकिस्तान ने कितनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली है? तालिबान की ताकत क्या है?
जवाब- स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट संजय मेस्टन ने कहा, 'पाकिस्तान सोचता है कि वह एयरफोर्स या ड्रोन (UAV) से हमला करके तालिबान को डरा देगा, लेकिन उसे यह नहीं पता कि पश्तून या कहें तो अफगानी किसी के सामने घुटने नहीं टेकता। वे जान दे देंगे लेकिन समझौता नहीं करेंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि अंत में लड़ाई जमीन पर ही लड़ी जाती है, जैसे- रूस और यूक्रेन व इजरायल-हमास की जंग में हमने देखा। और जमीनी लड़ाई, जैसे- गोरिल्ला वॉरफेयर और टेररिज्म वॉरफेयर में अफगान बहुत अनुभवी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन पाकिस्तानी जनरलों और हैंडलर्स ने उन्हें ट्रेनिंग दी है, तालिबान उन्हें बहुत अच्छी तरह जानता है। वे सीधे उन्हीं हैंडलर्स को निशाना बनाएंगे। पाकिस्तान ने जिस चीज को खुद पैदा किया है, अब वही उनके लिए सबसे बड़ा डर बन गया है।
सवाल- भारत के नजरिए से देखें तो पाकिस्तान और तालिबान की दुश्मनी भारत के लिए कितनी ठीक है? भारत इस स्थिति का फायदा कैसे उठा सकता है?
जवाब- रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन ने कहा, 'यह स्थिति भारत के लिए बहुत अच्छी है। बार-बार कहा जाता है कि भारत को चीन और पाकिस्तान से टू-फ्रंट वॉर का खतरा है। ऐसे में अगर पाकिस्तान खुद दो मोर्चों यानी भारत और अफगानिस्तान के फ्रंट पर उलझ रहता है, तो भारत को इसका फायदा उठाना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा कि भारत और अफगानिस्तान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते बहुत गहरे हैं। मुसीबत के समय भारत को उनकी मदद करनी चाहिए। भारत ये कदम उठा सकता है-
- राजनयिक मान्यता- सबसे पहले भारत को तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता देनी चाहिए, जैसे रूस और चीन ने दी है।
- मानवीय सहायता- ईरान के चाबहार रूट और एयरस्पेस का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के ऊपर से जाए बिना भारत को दवाइयां, राशन और जरूरी सामग्री पहुंचानी चाहिए।
- सैन्य सहायता- अफगानों के पास लड़ने का हौसला है, बस हथियारों की कमी है। भारत उन्हें हथियार दे सकता है। भारत अपने रिटायर्ड (Phase Out) हो चुके MiG-21 लड़ाकू विमान और UAV भी उन्हें दे सकता है।