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EXCLUSIVE: जहर उगलता था उस्मान हादी, 'ग्रेटर बांग्लादेश' का मैप भी इसी ने किया था जारी, एंटी इंडिया कैंपेन में कैसे था उसका अहम किरदार? पूर्व राजदूत से खास बातचीत में पढ़िए

Osman Hadi News: शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद कैसे उस्मान हादी की तरफ से फैलाने जा रहे ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ जैसे नैरेटिव, जमात-ए-इस्लामी और चीन-पाकिस्तान के समर्थन वाली ताकतों ने भारत-बांग्लादेश के संबंधों को सबसे नाज़ुक मोड़ पर ला खड़ा किया है, इस पर पढ़िए पूर्व राजदूत मंजू सेठ से एक्सक्लूसिव बातचीत।

Written By: Vinay Trivedi
Published : Dec 19, 2025 04:43 pm IST, Updated : Dec 19, 2025 05:00 pm IST
Osman Hadi killing- India TV Hindi
Image Source : PTI/NETINETI24 (TWITTER) एंटी इंडिया कैंपेन के अहम किरदार 'उस्मान हादी' पर बड़ा खुलासा!

Osman Hadi Killing Aftermath: 1971 में जिस बांग्लादेश की आजादी में भारत ने निर्णायक रोल निभाया, आज वही भारत पर सवाल उठा रहा है। बांग्लादेश की सड़कों पर जो उबाल है, स्टूडेंट आंदोलन के नाम पर जो कट्टरपंथ सामने आ रहा है, और हर गड़बड़ी का दोष जो सीधे भारत पर मढ़ा जा रहा है। इन्हीं मुश्किल सवालों के जवाब जानने के लिए INDIA TV ने बात की पूर्व राजदूत मंजू सेठ से। इस खास बातचीत में उन्होंने बेबाकी से बताया कि शेख हसीना के सरकार से बाहर होने के बाद कैसे भारत विरोधी एजेंडे को हवा दी गई, किस प्रकार से स्टूडेंट आंदोलन की आड़ में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतें सामने आईं, और कैसे चीन-पाकिस्तान के कथित सपोर्ट से उस्मान हादी जैसे लोगों ने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ जैसे खतरनाक नैरेटिव को प्रसारित किया। इस टेलीफोनिक इंटरव्यू में मंजू सेठ ने हर उस बात पर फोकस किया, जो भारत–बांग्लादेश के संबंधों को आज सबसे नाजुक मोड़ पर ले आई है। तो आइए जानते हैं कि बांग्लादेश में असल में क्या हो रहा है, और इसका प्रभाव सिर्फ ढाका तक सीमित होगा या फिर ये पूरे दक्षिण एशिया की सियासत को हिला देगा।

सवाल: बांग्लादेश में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं, पड़ोसी देश इतना अस्थिर कैसे हो गया है, वहां की मौजूदा सरकार इस सिचुएशन को क्यों कंट्रोल नहीं कर पा रही है?

जवाब: मंजू सेठ ने कहा कि वहां पर जो ये बार-बार ऐसा हो रहा है, वह उन तत्वों की वजह से हो रहा है जो प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना को हटाने के बाद आ गए हैं। उनका वहां पर एक बहुत इंपॉर्टेंट एजेंडा है एंटी-इंडिया। यही लोग इंडिया के खिलाफ बोल रहे हैं और शुरुआत से लेकर अभी भी एक्टिव हैं। यही फोरफ्रंट में आ रहे हैं और प्रोटेस्ट को लीड कर रहे हैं। वहां कुछ भी होता है तो वे इंडिया को ब्लेम करने लगते हैं। ये जो वहां पर मानसिकता बन गई है इंडिया की ही गलती बताने की, यही जिम्मेदार है। यह नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि बांग्लादेश का जो हाल हो रहा है वह इंडिया की वजह से हो रहा है।

मुझे लगता है कि एक और एलिमेंट है। वहां जो प्रोटेस्ट के लीडर्स हैं, वो सरकार में भी मेजॉरिटी में हैं और प्रोटेस्ट करने वालों में भी। ये लोग जमात-ए-इस्लामी के हैं और स्टूडेंट्स हैं। और उनको दूसरे देशों से सपोर्ट मिल रहा है। इसमें खासकर पाकिस्तान और चीन कहीं हद तक शामिल है। ये उनको प्रोत्साहित करते हैं। वे इंडिया को अस्थिर करने की मंशा रखते हैं। एंटी इंडिया बातें करते हैं। और वहां हमारे जो हाई कमिशन्स हैं और असिस्टेंट हाई कमिशन्स हैं, इन्होंने उन सबको अटैक करने का एक नया सिलसिला स्टार्ट कर दिया है।

हमें बहुत चौकन्ना रहना पड़ेगा और हमें देखना पड़ेगा कि ये क्यों उनकी सरकार रोकना नहीं चाहती है। हाई कमीशन और डिप्लोमैटिक मिशन्स को क्यों अटैक होने दे रही है। मुझे लग रहा है कि ये मिलीभगत है। ये मिलकर एंटी-इंडिया कैंपेन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें शामिल कई लोग ब्रेनवॉश हो चुके लोग हैं। इसके अलावा, रेडिकलाइज एलिमेंट भी हैं। और एक ये भी झूठ वहां पर फैलाया जा रहा है कि 1971 की लिबरेशन वॉर में भारत का रोल हमलावर का था और पाकिस्तान आर्मी ने उनको बचाया। इस टाइप का नैरेटिव बिल्डिंग वहां पर किया जा रहा है। ये पहले भी था लेकिन अब थोड़ा ज्यादा सुनने में आ रहा है।

सवाल: गोली लगने के बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान जिस स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी की मौत हो गई, उसकी मानसिकता क्या थी, कैसे वो भारत के खिलाफ जहर फैलाता था और बांग्लादेश के अंदर एंटी-इंडिया सेंटीमेंट फैलाने में उसका क्या योगदान था?

जवाब: उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो प्रोटेस्ट शुरू हुए थे, हमने देखा है तब से उस्मान हादी अपनी हर स्पीच में एंटी इंडिया बातें ही बोल रहा था। वहां पर स्टूडेंट लीडर वो बस नाम का ही था, भारत विरोधी कैंपेन और एंटी-इंडिया नैरेटिव बनाने में उसका इंटरेस्ट ज्यादा था। हाल में उसने एक वो मैप भी कैंपेनिंग के दौरान रिलीज कर दिया था 'ग्रेटर बांग्लादेश' का, जिसमें भारत के हिस्सों को बांग्लादेश के मैप में दिखाया गया था।

मुझे लगता है कि बांग्लादेश के बाहर से भी उसको सपोर्ट मिल रहा था। उसकी मंशा चीन और पाकिस्तान के मंसूबों से मेल खाती थी। नॉर्थ ईस्ट पर उनके अपने-अपने दावे हैं। नॉर्थ ईस्ट के कुछ हिस्से को चीन अपना बताता है और बांग्लादेश के उस्मान हादी जैसे लोग भी यही कह रहे हैं। ये नैरेटिव भी उस्मान हादी चला रहा था।

ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उस्मान हादी की यही मानसिकता थी। मुझे लग रहा है उसको चीन-पाकिस्तान से सपोर्ट मिल रहा था, तभी वो इतना खुलेआम इसको प्रोपगेट कर रहा था। पाकिस्तान ने भी कहा था कि भारत के खिलाफ थ्री-फ्रंट वॉर होगी। उनकी तरफ से टुकड़े करने की धमकी दी जाती है। ये पाकिस्तान के चीफ भी बोलते हैं और बांग्लादेश के लोग भी यही बोलने लगे। तो इस तरह की वहां पर जो सोच है और जो एक वो कोशिश कर रहे हैं कि इंडिया को कैसे नुकसान पहुंचाया जाए, कैसे इंडिया को टारगेट किया जाए, वो होता चला जा रहा है और हादी जो था, इन सब में वह एक प्रमुख आवाज था।

सवाल: बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ स्टूडेंट के नाम पर प्रदर्शन हुए थे, शेख हसीना के निकलने के बाद भी वो नहीं थमा। वहां की कट्टरपंथी ताकतों ने उस्मान हादी जैसे लोगों का इस्तेमाल किया या फिर ये कहें कि उस्मान हादी खुद कट्टरपंथी था तभी वह जल्द ही रेडिकलाइज ताकतों के साथ आवाज में आवाज मिलाने लगा?

जवाब: मंजू सेठ ने बताया कि मुझे लगता है कि कुछ हद तक उस्मान हादी ऑलरेडी रेडिकलाइज्ड था तभी वह इतनी आसानी से कट्टरपंथियों के साथ आया। वो एक मदरसे में पढ़ा हुआ था। उसके पिता भी वहीं पढ़ाते थे। वहीं से उसकी शुरुआत हुई। फिर उसके बाद उस्मान हादी ढाका यूनिवर्सिटी में आया। लेकिन उसकी जो सोच थी वो एंटी इंडिया और कट्टर थी। हालांकि, बांग्लादेश में पहले बहुत अलग माहौल था लंबे समय तक, वहां लोग इतने रेडिकलाइज्ड नहीं थे। लेकिन पिछले कुछ समय, कट्टरपंथी और रेडिकल एलिमेंट्स काफी इन्फ्लिट्रेट हुए बांग्लादेश में, जिसकी वजह से भारत विरोधी भावना उपजी।

अब हम देख रहे हैं कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भी इसको और इनकरेजमेंट दे रही है। जैसे मैंने कहा कि इनको बाहर से भी सपोर्ट मिला रहा है। चीन-पाकिस्तान के अलावा, अमेरिका की तरफ से भी इनको सपोर्ट मिलने की बात होती है। ये जो बाहर की शक्तियां हैं वो चाहती हैं कि बांग्लादेश को कंट्रोल किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि वो एक कोस्टल एरिया है। वह मरीन सिक्योरिटी के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। उसकी जो लोकेशन है, वह भी काफी अहम है। भारत का बांग्लादेश के साथ अबतक अच्छा रिलेशनशिप रहा, उसको तोड़ने की कोशिश हो रही है। वे अपने आपको स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

साथ ही, हमें पता है कि जो रेडिकल एलिमेंट्स हैं वो बांग्लादेश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। भारत का इन्फ्लुएंस ही था कि बांग्लादेश सेक्युलर कंट्री बनी, तो इसलिए भी वे भारत का विरोध करते हैं। मुझे लगता है प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना को भी इसीलिए वहां से हटाया गया क्योंकि वो एक सेक्युलर बांग्लादेश बनाए रखना चाहती थीं. हां ठीक है कि शेख हसीना ने कुछ चीजें अनडेमोक्रेटिक तरीके से की थीं। लेकिन ओवरऑल वो भारत के साथ अच्छे संबंध रख रही थीं। अन्य देशों के साथ भी उन्होंने अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश की थी। उन्होंने बांग्लादेश को सेक्युलर और जहां तक हो सकता था डेमोक्रेटिक कंट्री बनाने की कोशिश की थी।

सवाल: उस्मान हादी की अब हत्या हो गई है और आपने देखा कि मोहम्मद यूनुस ने उसके लिए राष्ट्रीय शोक तक घोषित कर दिया। इस हत्या के बाद बांग्लादेश में जो माहौल बना है उससे भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध कैसे प्रभावित होंगे? और क्या आप इसे केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति की समस्या मानती हैं या इसका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी प्रभाव पड़ेगा?

जवाब: उन्होंने कहा कि मुझे लग रहा है कि जो ये डे ऑफ मॉर्निंग (Day of mourning) अनाउंस किया गया है और उनके जो स्टूडेंट लीडर्स या एलिमेंट्स कह रहे हैं कि वे और प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने 'Prothom Alo' का ऑफिस जला दिया और जो वहां के प्रॉमिनेंट न्यूजपेपर्स हैं, उन्होंने उनके जर्नलिस्ट को टारगेट किया। ये भी कहा जा रहा है कि इलेक्शंस को इन्फ्लुएंस करने के लिए या इलेक्शंस को रद्द करने के लिए भी ऐसी कोशिश की जा रही है। तो बांग्लादेश में ये सिचुएशन बड़ी कॉम्प्लेक्स होती चली जा रही है।

वो तो चाहते ही हैं कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते खत्म हो जाएं। लेकिन हमारी तरफ से अभी अच्छा रिलेशनशिप है। अभी भी हमारा सब ट्रेड चल रहा है। लेकिन मुझे लग रहा है कि वो चाहते हैं कि ये भी बिल्कुल बंद हो जाए। तो इस वक्त जो सिचुएशन है वो बहुत टेंस है और उसका कोई भी एडवांटेज ले सकता है। ये बांग्लादेश के लिए अच्छा नहीं होगा। बांग्लादेश के लोगों के लिए अच्छा नहीं होगा। हमारी जो एम्बेसी और डिप्लोमेटिक मिशन को टारगेट किया जा रहा है और हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है, ये भी बहुत Unfortunate है। ये रिलेशनशिप को बिल्कुल इम्पैक्ट करेगा।

लेकिन हमारी कोशिश रहेगी क्योंकि वह अहम पड़ोसी है, इसको कैसे सॉल्व किया जाए। लेकिन मुझे लग रहा है कि वो समाधान करना नहीं चाहते हैं क्योंकि उनकी लीडरशिप की तरफ से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। तो अभी कहना मुश्किल है कि ये कितना खराब होने वाला है, लेकिन हमारी तरफ से बड़े बैलेंस्ड स्टेटमेंट गए हैं तो मुझे लग रहा है कि कोशिश रहेगी कि इन एलिमेंट्स को भी इंगेज किया जाए, उनका कुछ समाधान निकाला जाए। लेकिन अगर हद से ज्यादा बात बढ़ गई तो कह नहीं सकते कि दोनों देशों की रिलेशनशिप पर कितना ज्यादा बुरा इम्पैक्ट पड़ेगा।

सवाल: भारत और बांग्लादेश का संबंध जो 1971 से बना हुआ था, हमने उनको आजादी दिलाई, इसमें उस्मान हादी जैसी मानसिकता के लोग और भी जो जमात-ए-इस्लामी कट्टरपंथी हैं वो क्यों और कैसे रोड़ा बन रहे हैं?

जवाब: मंजू सेठ ने कहा कि चाहे उस्मान हादी रहे हों, मोहम्मद युनुस हों या जमात ए इस्लामी के लोग, ये सभी एंटी इंडिया बयान देकर ही अपनी पॉलिटिक्स चमकाते रहे हैं। इतना ही नहीं, इंडिया के साथ जितने लोग Align रहते हैं, ये लोग उनको भी टारगेट करते हैं। चाहे वो शेख हसीना हों, वहां की हिंदू माइनॉरिटी हो या अन्य अल्पसंख्यक लोग हों। बांग्लादेश में अभी जो हालात हैं और जो लोग सत्ता में काबिज हैं उनको गतिविधियां देखकर नहीं लगता है कि वह भारत के साथ संबंध सुधारना चाहते भी हैं। बांग्लादेश में जब शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग सरकार नहीं थी, यानी BNP की सरकार थी तब भी इतने खराब संबंध नहीं रहे थे। हालांकि, भारत की तरफ से अब तक कोई ऐसा स्टेप नहीं लिया गया है जिससे खटास आए। भारत सरकार और हाई कमीशन के लोग बड़ी ही जिम्मेदारी और संतुलित तरीके से जवाब दे रहे हैं। हमारी तरफ से बिजनेस और बाकी प्रोजेक्ट्स जैसे चल रहे थे वैसे आज भी चल रहे हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वहां एंटी इंडिया सेंटीमेंट पनप रहा है।

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