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'सरकार के इशारे पर आपने मुझे बोलने से रोका, यह लोकतंत्र पर काला धब्बा', राहुल गांधी की स्पीकर के नाम चिट्ठी

राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के इशारे पर खुद को सदन में बोलने से रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर काला धब्बा है।

Edited By: Khushbu Rawal @khushburawal2
Published : Feb 03, 2026 11:40 pm IST, Updated : Feb 03, 2026 11:40 pm IST
rahul gandhi- India TV Hindi
Image Source : PTI कांग्रेस नेता राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सुर्खियों में बने हुए हैं लेकिन आज सबका फोकस अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर आ गया। हालांकि आज राहुल गांधी ने एक बार फिर लोकसभा में एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब को कोट करने की कोशिश तो स्पीकर ने उन्हें रोक दिया। इस पर कांग्रेस के सांसद हंगामा करने लगे। लोकसभा सेक्रेट्री की टेबल से कागज उठाकर स्पीकर की तरफ फेंके। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस पर कड़ा एतराज जताया और कागज उछालने वाले सांसदों के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव रखा। लोकसभा में ध्वनि मत से हंगामा करने वाले अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला समेत कांग्रेस 8 सांसदों को मौजूदा सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

'PM मोदी ने जल्दीबाजी में अमेरिका के साथ डील की'

इसके बाद राहुल गांधी सदन के बाहर आए। उन्होंने कांग्रेस के सांसदों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की और उन पर इल्जाम लगाए। राहुल ने कहा कि वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं लेकिन सरकार उन्हें नहीं बोलने दे रही क्योंकि मोदी डरते हैं, इसी चक्कर में पीएम मोदी ने जल्दीबाजी में अमेरिका के साथ डील की है। 

'विपक्ष को बोलने से रोकना लोकतंत्र पर कलंक'

इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के इशारे पर खुद को सदन में बोलने से रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर काला धब्बा है। उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सदस्य का बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है, लेकिन इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को दरकिनार किए जाने के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है।

पत्र में राहुल ने और क्या कहा?

पत्र में राहुल गांधी ने कहा, ''सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आपने मुझे उस पत्रिका के लेख को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका मैं उल्लेख करना चाहता था। आज जब मैंने अपना भाषण फिर से शुरू किया, तो मैंने उस दस्तावेज को सत्यापित कर दिया। लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व अध्यक्षों के बार-बार दिए गए निर्णयों के अनुसार, यदि कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करना चाहता है, तो उसे पहले उसे सत्यापित करना होता है और सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है। एक बार यह शर्त पूरी हो जाए, तो अध्यक्ष सदस्य को उस दस्तावेज़ को उद्धृत करने या उसका संदर्भ देने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस पर उत्तर देना सरकार की जिम्मेदारी होती है और अध्यक्ष की भूमिका वहीं समाप्त हो जाती है।''

राहुल ने आगे कहा, ''आज लोकसभा में मुझे बोलने से रोकना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह गंभीर आशंका भी पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर, नेता प्रतिपक्ष होने के नाते, मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना आवश्यक है कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिस पर संसद में चर्चा होना अनिवार्य है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के इशारे पर अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना पड़ा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, यह हमारे लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है, जिसके विरुद्ध मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।

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