Explainer: अमेरिकी विदेश नीति ट्रंप प्रशासन की दूसरी पारी में लगातार लड़खड़ा रही है। अमेरिका के सहयोगी देश भी उससे खुद को दूर करते जा रहे हैं। यह सब ट्रंप के टैरिफ और "अमेरिका फर्स्ट" के नाम पर की जा रही वैश्विक प्रभाव डालने वाली कार्रवाइयों की वजह से हो रहा है। अब जनवरी 2026 की शुरुआत में ही ट्रंप ने सहयोगियों पर आक्रामक टैरिफ युद्ध छेड़ दिया है, जिससे वैश्विक गठबंधन टूट रहे हैं और चीन को फायदा मिल रहा है।
भारत से लेकर कनाडा यूरोप तक ने अमेरिका से बनाई दूरी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हैवी टैरिफ की वजह से भारत से लेकर कनाडा, चीन और यूरोपीय सहयोगी भी अब अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ से बड़ी ट्रेड डील करके अमेरिका को सबसे बड़ा झटका दिया है। वहीं चीन ने ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील करके अमेरिका को औकात दिखाई है। ट्रंप की नीतियों की वजह से ही अमेरिका के रिश्ते अब भारत से लेकर कनाडा, यूरोप तक से तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके दूरगामी परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और शक्ति संतुलन पर पड़ सकते हैं।
ट्रंप के व्यापार युद्ध ने दुनिया में मचाई हलचल
ट्रंप की नीति का मुख्य आधार व्यापार युद्ध है। इसी ने अमेरिका के दुनिया भर में सहयोगी देशों का भरोसा तोड़ दिया है। लिहाजा अब अमेरिका से उसके सभी पुराने सहयोगी दूरी बना रहे हैं। ट्रंप ने इस दौरान चीन पर पहले से चल रहे टैरिफ को और सख्त किया है। साथ ही अब यूरोपीय सहयोगियों पर भी हमला बोला है।
कनाडा-चीन में होने वाली है बड़ी ट्रेड दील
ब्रिटेन और भारत से डील करने के बाद चीन अब कनाडा के साथ भी बड़ी ट्रेड डील करने जा रहा है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए और बड़ा झटका होगा। अमेरिका की ओर से कनाडा को चीन के साथ ट्रेड डील करने पर 100% टैरिफ की धमकी दी गई है। इससे पहले ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिकी रुख का समर्थन नहीं करने वाले यूरोपीय संघ के देशों विशेषकर डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, यूके पर ट्रंप ने 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसे बाद में दावोस सम्मेलन के दौरान उन्होंने वापस ले लिया। मगर ट्रंप की धमकी की वजह से यूरोपीय सहयोगियों के विश्वास में दरार पड़ गई।
भारत ने खोजा अपना रास्ता, अमेरिका को लगा बड़ा रणनीतिक झटका
ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के नाम पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। मगर भारत इसके आगे झुका नहीं। पहले यूरेशिया, चीन और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ ट्रेड डील की और अब यूरोपीय संघ के साथ बड़ी डील करके अमेरिका को बड़ा झटका दिया। भारत ने अमेरिकी टैरिफ का सामना करने के लिए अपने परंपरागत प्रतिद्वंदी चीन के साथ कई समझौते किए। अमेरिका के तमाम सहयोगी देशों का झुकाव अब चीन की ओर हो रहा है। यह अमेरिका के लिए बड़ा रणनीतिक झटका है।
चीन की ओर हो रहा अमेरिका के सहयोगियों का झुकाव
ट्रंप के टैरिफ की वजह से अब अमेरिकी सहयोगियों का चीन की ओर झुकाव बढ़ता जा रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बीजिंग जाकर चीन के साथ "नई रणनीतिक साझेदारी" की घोषणा की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी चीन यात्रा की और स्कॉच व्हिस्की टैरिफ में कटौती हासिल की। यूरोप ने भारत के साथ FTA तेज किया। ये कदम ट्रंप की अनिश्चितता से बचाव के तौर पर उठाए गए हैं, लेकिन इसका फायदा वैश्विक व्यापार में चीन को मिल रहा है। एक सर्वे के अनुसार यूरोप में अमेरिका को अब "सहयोगी" कम और "प्रतिद्वंद्वी" ज्यादा मानते हैं।
ट्रंप के फैसले से वैश्विक विकास दर धीमी
ट्रंप के इस फैसला का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। हैवी टैरिफ से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो रही हैं। IMF के अनुमान के अनुसार 2026 में वैश्विक विकास दर 3.1% रह सकती है। अमेरिकी टैरिफ से मुद्रास्फीति बढ़ रही है और GDP में 0.5-0.7% की कमी आ सकती है। सहयोगी देश (कनाडा, यूरोप) अपनी अर्थव्यवस्थाओं को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी निर्यात प्रभावित होगा। चीन का ट्रेड सरप्लस बढ़ रहा है, जबकि अमेरिका "सेल अमेरिका" सेंटिमेंट से जूझ रहा है।
सुरक्षा गठबंधनों में दरार
अमेरिका के इस कदम से सुरक्षा गठबंधनों में भी दरारें आने लगी हैं। NATO में ट्रंप की "फ्री-राइडर" आलोचना और यूक्रेन सहायता में उतार-चढ़ाव से यूरोप अपनी रक्षा क्षमता बढ़ा रहा है। ग्रीनलैंड विवाद से आर्कटिक में NATO की एकता कमजोर हुई। अमेरिका को अब "अनरिलायबल पार्टनर" माना जा रहा है, जिससे सहयोगी भारत, चीन या रूस की ओर झुक सकते हैं। आने वाले समय में अमेरिका की वैश्विक प्रभाव कमजोर होगा, क्योंकि कोई भी संकट में अमेरिका के साथ खड़ा नहीं होगा।
बहुपक्षीय व्यवस्था का अंत
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादूरो को बंधक बनाने, ईरान पर हमला करने और दूसरी बार हमले की धमकी देने व ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा करने के ट्रंप के प्रयासों के बीच बहुपक्षीय व्यवस्था पर देशों का भरोसा बढ़ रहा है। ट्रंप ने UN से जुड़े कई संगठनों से निकासी की, पेरिस समझौते से बाहर होने की धमकी दी। इससे "रूल्स-बेस्ड ऑर्डर" कमजोर हो रहा है। चीन खुद को "विश्वसनीय भागीदार" के रूप में पेश कर रहा है। भारत जैसे देश मध्य शक्ति के रूप में स्वतंत्र रुख अपना रहे हैं, लेकिन अमेरिकी अलगाव से एशिया में चीन का दबदबा बढ़ेगा।
ट्रंप की नीति अमेरिका को अल्पावधि में "मजबूत" दिखाती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह आत्मघाती साबित हो रही है। सहयोगी अलग हो रहे हैं, चीन मजबूत हो रहा है, और वैश्विक अर्थव्यवस्था-अस्थिरता बढ़ रही है। "अमेरिका अकेला" होता जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया बहुध्रुवीयकरण की ओर बढ़ रही है।
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