Thursday, January 29, 2026
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Explainer: क्या थे UGC के वो नियम जिनपर जमकर हुआ बवाल, सवर्णों ने जताई थी आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक

UGC ने नए रेगुलेशन को लेकर देशभर के विभिन्न राज्यों में भारी विरोध हो रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। आइए जानते हैं क्यों इस नए एक्ट पर मचा था बवाल और क्या थी विरोध करने वालों की मांग।

Edited By: Subhash Kumar @ImSubhashojha
Published : Jan 29, 2026 02:55 pm IST, Updated : Jan 29, 2026 03:36 pm IST
supreme court ugc new rules- India TV Hindi
Image Source : PTI यूजीसी के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक।

UGC के नए नियमों के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की। CJI सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई करते हुए कई सख्त टिप्पणी की और UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। बता दें कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले UGC के नए नियमों को लेकर बीते कई दिनों से भारी बवाल मचा हुआ था। सवर्णों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताया था। तो आखिर क्या थे यूजीसी के वे नियम जिनका विरोध हो रहा था, इसे लेकर सवर्ण जातियों की मांग और आपत्ति क्या थी और सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर क्या कहा? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब हमारी इस खबर में।

UGC के किन नियमों पर घमासान?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले रोहित वेमुला केस पर सुनवाई करते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने के लिए नियम-कानून बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद यूजीसी ने नए नियम लाए। इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेज में समता कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया है। SC ST और OBC छात्र इस कमेटी के सामने जातिगत भेदभाव के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। बता दें कि SC ST वर्ग के छात्रों को पहले भी शिकायत का अधिकार था। अब इसमें OBC वर्ग को भी शामिल किया गया है। जो कमेटी होगी उसमें SC ST और OBC वर्ग के प्रतिनिधि होने चाहिए। हालांकि, इस कमेटी में सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि हो ऐसा जरूरी नहीं हैं। विवाद का दूसरा कारण है कि पहले ऐसा प्रावधान था कि अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ एक्शन होगा। हालांकि, नए नियमों में यूजीसी ने ऐसा प्रावधान खत्म कर दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के बाद आया एक्ट
  • उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने का एक्ट
  • SC और ST के अलावा OBC के छात्र भी शामिल
  • सवर्णों को छोड़कर सभी वर्गों को पीड़ित की लिस्ट में डाला
  • इक्विटी कमेटी और हियरिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव
  • दोनों कमेटियों में सवर्ण सदस्य होना अनिवार्य नहीं
  • झूठी शिकायत करने पर सज़ा का प्रावधान नहीं
  • शिकायत पर संस्थान को 15 दिन में करनी होगी सुनवाई
  • संस्थान संतोषजनक कार्रवाई नहीं करता तो रुक सकता है फंड

UGC एक्ट को लेकर सवर्ण समाज की क्या मांग?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार ने UGC एक्ट में बदलाव किए थे। यूजीसी की ओर से नए नियम बीते 13 जनवरी को जारी किए गए थे। हालांकि, इन नियमों को लेकर सवर्ण वर्ग के छात्रों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई। विरोध करने वालों का तर्क है कि यूजीसी के एक्ट में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है, उससे ऐसा लगता जैसे जातिगत भेदभाव सिर्फ  SC, ST और OBC के साथ ही होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को कोई संस्थागत संरक्षण नहीं दिया गया है। ये एक्ट खुद भेदभाव बढ़ाता है। इस एक्ट में सवर्णों को 'नेचुरल ऑफेंडर' माना गया है। सवर्णों की मांग थी कि किसी के साथ भेदभाव पर एक्शन लेने का प्रावधान किया जाए और झूठी शिकायत करने वालों पर भी एक्शन का प्रावधान हो।

  • किसी के साथ भी भेदभाव होने पर एक्शन
  • झूठी शिकायत करने वालों को मिले सज़ा

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ने मामले की सुनवाई करते हुए यूजीसी के नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। CJI ने कहा है कि हम UGC के नए नियमों को देख रहे हैं। UGC के नए नियमों पर कमेटी बनाई जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि हम जाति विहीन समाज की तरफ बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं। भारत में अमेरिका जैसे हालात नहीं बनने चाहिए। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हॉस्‍टल में छात्र एक साथ रहते हैं और कैंपस में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि हम केंद्र सरकार से जवाब तलब करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

राजनीतिक बयानबाजी भी जारी

UGC के नए नियमों का विरोध ही नहीं उस पर पॉलिटिक्स भी जमकर हो रही है। अखिलेश यादव से जब UGC के नए नियमों को लेकर सवाल हुआ तो उन्होंने क्या कहा कि दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं। पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी UGC के नए नियमों के खिलाफ आवाज उठा दी है। कलराज मिश्र ने तो UGC के नए नियमों को असंवैधानिक तक बता दिया। कलराज मिश्र ने यूजीसी एक्ट पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया। कलराज मिश्रा ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन किसी एक वर्ग विशेष को संदेह के दायरे में रखकर उनके खिलाफ निगरानी और अनुशासनात्मक टीम गठित करना ना केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी अत्यंत घातक है। इसके अलावा भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने भी इन नियमों का विरोध किया है। वहीं, सांसद चंद्रशेखर समेत कई नेताओं ने यूजीसी के नियमों का समर्थन भी किया है।

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