उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform civil code) लागू हुए एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में इस कानून का सकारात्मक असर नज़र आने लगा है। शादियों के रजिस्ट्रेशन की संख्या बीस गुना तक बढ़ गई, लिव-इन रिलेशन के रजिस्ट्रेशन भी बढ़े। आपसी रिश्तों में लड़कियों के साथ उत्पीड़न के मामलों में भी भारी कमी देखी गई। उत्तराखंड में पहले रोज़ाना औसतन सिर्फ 67 शादियों के रजिस्ट्रेशन होते थे लेकिन UCC लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1400 से ज्यादा हो गई।
पिछले एक साल में करीब 5 लाख लोगों ने शादियों का रजिस्ट्रेशन करवाया है। इतना ही नहीं तलाक़, वसीयत के पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन जैसी सर्विस को भी UCC के ज़रिए डिजिटल, पारदर्शी और आसान बनाया गया है। एक साल में इन सर्विसेज़ को लेकर करीब 5 लाख से ज़्यादा आवेदन मिले और 95 परसेंट मामलों का निपटारा हो चुका है। खास बात ये है कि इस दौरान किसी ने भी निजता (Privacy) के हनन की शिकायत दर्ज नहीं कराई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वैसे तो UCC से समाज के हर वर्ग को फायदा हुआ है, लेकिन महिलाओं को इसने सबसे ज्यादा शक्ति दी है। जब UCC लागू किया गया था, तो कई तरह की अटकलें लगाई गईं थी।
किसी ने कहा कि सरकार लोगों के घरों में झांकेगी, लव मैरेज पर पाबंदी लगा देगी। किसी ने कहा कि लिव-इन में रहने वालों को जेल में डाल दिया जाएगा, मुसलमानों को निकाह की बजाय फेरे लगाने होंगे लेकिन ये सारी आशंकाएं बेबुनियाद साबित हुईं। इसीलिए किसी भी कानून पर कमेंट करने से पहले उसके अनुपालन का इंतज़ार करना चाहिए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक रास्ता दिखाया है। उत्तराखंड में UCC लागू करने के बाद जो आंकड़े आये हैं, वो तो इस बात के लिए हौसला देते हैं कि ऐसा कानून अब दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। (रजत शर्मा)
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