वायदा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी ने अबतक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सुबह 10 बजकर 24 मिनट पर चांदी बीते सत्र के मुकाबले सीधे 6 प्रतिशत की धमाकेदार उछाल के साथ पहली बार 4 लाख रुपये के लेवल के पार चली गई। इसी समय कीमत 4,08,481 रुपये प्रति किलोग्राम पर चली गई। इसी तरह, सोना भी बीते सत्र के मुकाबले 7.89 प्रतिशत की बंपर उछाल के साथ 1,79,001 रुपये प्रति 10 ग्राम पर जा पहुंचा। बढ़ती कीमत का खुदरा बाजार पर भी असर देखने को मिल रहा है।
देश के प्रमुख महानगरों में आज सोने की कीमतें
- देश के प्रमुख शहरों में आज सोने की कीमतों में हल्का अंतर देखने को मिला। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना 17,900 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 16,410 रुपये प्रति ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 18 कैरेट सोना 13,429 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है।
- मुंबई में आज 24 कैरेट सोने का भाव 17,885 रुपये प्रति ग्राम रहा। 22 कैरेट सोना यहां 16,395 रुपये प्रति ग्राम पर उपलब्ध है, जबकि 18 कैरेट सोने की कीमत 13,414 रुपये प्रति ग्राम दर्ज की गई।
- कोलकाता में भी सोने के दाम मुंबई के समान रहे। यहां 24 कैरेट सोना 17,885 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 16,395 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 13,414 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
- दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में सोने की कीमतें अपेक्षाकृत ऊँचे स्तर पर रहीं। यहां 24 कैरेट सोना 18,328 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 16,800 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 13,900 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है।
- बेंगलुरु में आज 24 कैरेट सोने का भाव 17,885 रुपये प्रति ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोना 16,395 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 13,414 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
ग्लोबल मार्केट में सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया
गुरुवार को सोने की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया, जब यह 5,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में लगातार कमजोरी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को और मज़बूत किया। बाजार में तेजी तब और तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डॉलर के चार साल के निचले स्तर तक फिसलने को तवज्जो नहीं दी। उनके रुख से संकेत मिला कि प्रशासन मुद्रा की कमजोरी को लेकर चिंतित नहीं है, भले ही टैरिफ से जुड़े तनाव बने हुए हों और फेडरल रिज़र्व की स्वतंत्रता को लेकर आलोचना फिर सामने आई हो।
इस बीच, फेडरल रिज़र्व ने अपेक्षाओं के मुताबिक, ब्याज दरों को यथावत रखा। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक गतिविधियों में मजबूती और श्रम बाजार में शुरुआती सुधार के संकेतों की ओर इशारा किया, लेकिन साथ ही ऊंची महंगाई और अनिश्चित भविष्य को लेकर सतर्कता भी जताई। फेड के दो नीति-निर्माताओं ने तत्काल दर कटौती के पक्ष में मत दिया, जिससे इस साल के अंत में मौद्रिक नीति में ढील की संभावनाएं बनी हुई हैं।






































