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Gold Loan: दो साल में दोगुना हुआ सोने के बदले कर्ज, लेने में पुरुष आगे लेकिन चुकाने में महिलाओं का दबदबा

बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारतीय परिवारों के लिए सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद सहारा बनकर उभरा है। यही वजह है कि देश में सोने के आभूषण के बदले कर्ज यानी गोल्ड लोन का बाजार बीते दो वर्षों में रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ा है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Jan 29, 2026 08:27 am IST, Updated : Jan 29, 2026 08:27 am IST
सोने के बदले कर्ज में...- India TV Paisa
Photo:CANVA सोने के बदले कर्ज में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय परिवारों के लिए सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद सहारा बनकर उभरा है। पारंपरिक निवेश से आगे बढ़कर अब सोना जरूरत के वक्त तुरंत नकदी जुटाने का साधन बन गया है। यही वजह है कि देश में सोने के आभूषण के बदले लिए जाने वाले कर्ज यानी गोल्ड लोन में बीते दो सालों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।

क्रिफ हाई मार्क की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 तक भारत में गोल्ड लोन का कुल पोर्टफोलियो करीब दोगुना होकर 15.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। नवंबर 2023 में यह आंकड़ा 7.9 लाख करोड़ रुपये था। सिर्फ बीते एक साल में ही गोल्ड लोन में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि इससे पहले के साल में इसमें 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यह रफ्तार बताती है कि बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) इस सुरक्षित माने जाने वाले कर्ज खंड में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

गोल्ड लोन की बढ़ती हिस्सेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें और मजबूत गारंटी गोल्ड लोन को कर्जदाताओं और उधारकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षक बना रही हैं। यही कारण है कि कुल खुदरा ऋण पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। नवंबर 2025 के अंत तक यह हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो एक साल पहले 8.1 प्रतिशत थी।

कम खाते, ज्यादा रकम

हालांकि, गोल्ड लोन लेने वाले खातों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है और यह सिर्फ करीब 10.3 प्रतिशत ही बढ़ी है। इसका मतलब यह है कि लोग कम संख्या में लेकिन ज्यादा रकम का कर्ज ले रहे हैं। 2.5 लाख रुपये से अधिक के गोल्ड लोन अब कुल पोर्टफोलियो का लगभग आधा हिस्सा बन चुके हैं, जबकि मार्च 2023 में इनकी हिस्सेदारी महज 36.4 प्रतिशत थी।

कर्ज पुरुषों का, भरोसा महिलाओं पर

रिपोर्ट में एक दिलचस्प सामाजिक पहलू भी सामने आया है। गोल्ड लोन लेने के मामले में पुरुष आगे हैं और कुल कर्ज का 56 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पुरुष उधारकर्ताओं के नाम है। लेकिन जब बात कर्ज चुकाने की आती है, तो महिलाएं ज्यादा जिम्मेदार साबित हो रही हैं। महिला कर्जदारों का रिपेमेंट रिकॉर्ड पुरुषों की तुलना में बेहतर पाया गया है।

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