हिमाचल प्रदेश सरकार ने दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला रूट पर रेगुलर फ्लाइट सर्विस शुरू करने और उनका लगातार ऑपरेशन सुनिश्चित करने के लिए हर साल 31 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को ये जानकारी दी। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य उच्चस्तरीय और समयबद्ध पर्यटन को बढ़ावा देना है। प्रवक्ता ने ये भी बताया कि ये फ्लाइट्स रोजाना ऑपरेट होंगी। प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने टूरिज्म को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और सैलानियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा पर्यटन
उन्होंने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं के लिए नौकरियां सृजित करने और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इस एयर कनेक्टिविटी से टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। इस पहल से यात्रा का समय कम होगा, पहुंच में सुधार होगा और पर्यटकों और कारोबारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा।’’ उन्होंने ये भी कहा कि शिमला और धर्मशाला के लिए भरोसेमंद हवाई सेवाएं उपलब्ध होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली मजबूत होगी, गंभीर मरीजों को एयर रूट से जल्दी अस्पताल पहुंचाना संभव होगा और आपात स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
सभी जिला मुख्यालय और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बनाए जाएंगे हेलीपोर्ट
प्रवक्ता ने कहा कि इससे रियायती क्षेत्रीय हवाई संपर्क से रोजाना के यात्रियों, कारोबारियों और पर्यटकों सभी को समान रूप से लाभ होगा। तीन चालू एयरपोर्ट के अलावा, राज्य में कई हेलीपैड हैं और प्रत्येक जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में, संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रेकॉन्ग पिओ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जो पर्यटकों को राज्य की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त, संजौली-रामपुर-रेकॉन्ग पिओ और संजौली-मनाली रूट पर हेलीकॉप्टर सेवाएं भी जल्द ही शुरू हो जाएंगी। इन रूटों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं की मंजूरी के लिए नागर विमानन महानिदेशालय को प्रस्ताव पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके हैं।



































