NHAI के समर्थन वाली कंपनी राजमार्ग इन्फ्रा इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (Raajmarg InvIT) का आईपीओ आज बंद हो गया। ये आईपीओ बुधवार, 11 मार्च को खुला था। सरकार के समर्थन वाले इस आईपीओ को निवेशकों का भी शानदार सपोर्ट मिला। राजमार्ग इन्फ्रा इंवेस्टमेंट ट्रस्ट के आईपीओ को बोली के आखिरी दिन शुक्रवार को कुल 13.74 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, 6,000 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के तहत ऑफर किए गए 21,33,33,150 शेयरों के मुकाबले कुल 2,93,14,93,200 शेयरों के लिए आवेदन मिले।
6000 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है कंपनी
राजमार्ग इन्फ्रा इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (RIIT) ने आईपीओ खुलने से पहले शुक्रवार को एंकर इन्वेस्टर्स से 1,728 करोड़ रुपये जुटाए थे। RIIT अपने इस आईपीओ से कुल 6000 करोड़ रुपये जुटा रही है, जिसके लिए 60,00,00,000 शेयर जारी किए जाएंगे। ये आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश शेयरों पर आधारित है और इसमें ओएफएस की कोई हिस्सेदारी नहीं है। कंपनी ने अपने आईपीओ के तहत प्रत्येक शेयर के लिए 99-100 रुपये का प्राइस बैंड फिक्स किया था। ये एक मेनबोर्ड आईपीओ है, जो घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख एक्सचेंजों बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होगा।
आईपीओ को निवेशकों से मिले बंपर समर्थन से गदगद हुए नितिन गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने RIIT के आईपीओ को निवेशकों से मिले बंपर समर्थन पर खुशी जताई है। मंत्री ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ''ये बताते हुए खुशी हो रही है कि NHAI द्वारा प्रायोजित Raajmarg InvIT के पहले IPO को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है और ये लगभग 14 गुना सब्सक्राइब हुआ है। ये प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की विकास गाथा और वित्तीय बाजारों में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। अलग-अलग तरह के निवेशकों की भागीदारी भारत सरकार के पारदर्शी और सुधार-उन्मुख एसेट मोनेटाइजेशन कार्यक्रम में उनके भरोसे को उजागर करती है।''
क्या है कंपनी का उद्देश्य
RIIT का आईपीओ राष्ट्रीय राजमार्ग के बुनियादी ढांचा के विकास में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सार्वजनिक निवेश ट्रस्ट का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग की संपत्तियों से कमाई की संभावनाओं को खोलना है। इसके साथ ही एक उच्च-गुणवत्ता वाला, दीर्घकालिक निवेश साधन तैयार करना भी इसका उद्देश्य है। इस इनविट के शुरुआती परियोजना समूह में झारखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक की 5 टोल संग्रह सड़कें शामिल हैं। ये सड़कें 260 किलोमीटर से ज्यादा लंबी हैं और 'स्वर्ण चतुर्भुज' परियोजना का हिस्सा हैं।



































