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मिडिल ईस्ट की जंग ने डुबोया मुंबई का फ्रूट मार्केट! कौड़ियों के दाम बिक रहे फल, व्यापारियों के निकले आंसू

 Written By: Sachin Chaudhary Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 13, 2026 01:01 pm IST,  Updated : Mar 13, 2026 01:01 pm IST

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। मुंबई और उसके पास स्थित नवी मुंबई का सबसे बड़ा फल बाजार इन दिनों भारी संकट से गुजर रहा है। खाड़ी देशों में फलों का एक्सपोर्ट लगभग ठप पड़ने से बाजार में माल का अंबार लग गया है और फलों के दाम अचानक जमीन पर आ गए हैं।

फ्रूट मार्केट में...- India TV Hindi
फ्रूट मार्केट में कौड़ियों के दाम बिक रहे तरबूज-पपीता Image Source : ANI

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के बाजारों तक पहुंचने लगा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के पास स्थित एशिया के सबसे बड़े फल मंडियों में से एक APMC फ्रूट मार्केट वाशी में इन दिनों हालात काफी खराब हैं। खाड़ी देशों को होने वाला फलों का निर्यात लगभग रुक गया है, जिससे बाजार में माल की भरमार हो गई है और कीमतें तेजी से गिर गई हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों और व्यापारियों दोनों को उठाना पड़ रहा है।

फल व्यापारियों के मुताबिक, रमजान के दौरान खाड़ी देशों में भारतीय फलों की काफी मांग रहती है। खासकर तरबूज, पपीता, खरबूजा और अंगूर जैसे फलों का बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है। लेकिन मौजूदा युद्ध और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से निर्यात लगभग ठप हो गया है। नतीजा यह है कि जो फल विदेशों में भेजे जाने थे, वही अब स्थानीय बाजार में आ रहे हैं। इससे मंडी में सप्लाई अचानक बढ़ गई है और दाम गिरते जा रहे हैं।

फलों की कीमतों में भारी गिरावट

वाशी की एपीएमसी मंडी में इन दिनों फलों के दाम तेजी से नीचे आ गए हैं। तरबूज, जो पहले थोक में 30-35 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब सिर्फ 8-10 रुपये प्रति किलो रह गया है। पपीता, जो पहले 30-35 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब 20-25 रुपये में बिक रहा है। वहीं, अंगूर के 9 किलो के कैरेट की कीमत, जो पहले 1500-1600 रुपये थी, अब गिरकर 500-600 रुपये तक पहुंच गई है। इतनी बड़ी गिरावट के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सड़ने लगा फल, बढ़ी परेशानी

मंडी में रोजाना बड़ी मात्रा में फल पहुंच रहे हैं। पहले यहां करीब 2000 टन फल रोजाना आते थे, लेकिन अब इससे भी ज्यादा माल आने लगा है। मांग कम होने के कारण कई बार फल बिक नहीं पाते और खराब होने लगते हैं। मंडी में कई जगह सड़े हुए फलों के ढेर भी दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें व्यापारियों को मजबूरी में फेंकना पड़ रहा है।

सरकार से मदद की मांग

व्यापारियों और किसानों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार को निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए या राहत पैकेज देना चाहिए, ताकि किसानों और व्यापारियों को कुछ राहत मिल सके।

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