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US Federal Reserve का बड़ा फैसला: महंगाई के दबाव और मजबूत जॉब मार्केट के बीच ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, शेयर बाजार में मचेगी खलबली?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jan 29, 2026 07:35 am IST,  Updated : Jan 29, 2026 07:35 am IST

दुनिया की सबसे ताकतवर सेंट्रल बैंक मानी जाने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा फैसले पर ग्लोबल मार्केट की नजरें टिकी रहीं। निवेशकों को जहां महंगाई में नरमी के संकेतों के बीच ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी, वहीं फेड ने सतर्क रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया।

अमेरिका में ब्याज...- India TV Hindi
अमेरिका में ब्याज दरों पर ब्रेक Image Source : ANI

अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने एक बार फिर ब्याज दरों पर ब्रेक लगाते हुए बाजारों को सतर्क कर दिया है। लगातार ऊंची बनी महंगाई, मजबूत श्रम बाजार और राजनीतिक दबावों के बीच फेड ने अपनी प्रमुख नीति दर में कोई बदलाव नहीं किया। इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल मार्केट्स और भारतीय शेयर बाजार की चाल पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

ब्याज दरें जस की तस, बाजार की उम्मीदों पर लगा ब्रेक

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में अमेरिकी फेड ने फेडरल फंड्स रेट को 3.5% से 3.75% के दायरे में ही बनाए रखने का फैसला किया। यह निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन इससे यह संकेत भी मिला कि फेड फिलहाल जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के मूड में नहीं है। नीति निर्माताओं का फोकस इस समय श्रम बाजार की मजबूती और महंगाई में आ रही नरमी की रफ्तार पर टिका हुआ है।

महंगाई अभी भी फेड के टारगेट से ऊपर

हालांकि महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन स्थिति अब भी फेड के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, फूड और एनर्जी को छोड़कर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) इंडेक्स करीब 3% सालाना रह सकता है, जो फेड के 2% के लॉन्ग टर्म टारगेट से काफी ऊपर है। यही वजह है कि ब्याज दरों में कटौती पर फिलहाल विराम लगा हुआ है।

मजबूत जॉब मार्केट ने बढ़ाई फेड की दुविधा

अमेरिकी श्रम बाजार अभी भी मजबूत बना हुआ है, जिससे फेड के लिए फैसला लेना आसान नहीं है। दिसंबर में बेरोजगारी दर घटकर 4.4% रह गई, हालांकि नई नौकरियां पहले की तुलना में कम बनीं। इसका मतलब है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था फिलहाल ठीक स्थिति में है और इसलिए फेड पर ब्याज दरों में जल्द कटौती करने का ज्यादा दबाव नहीं है।

राजनीतिक दबाव और फेड की स्वतंत्रता पर सवाल

इस फैसले के पीछे राजनीतिक माहौल भी असहज बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऊंची ब्याज दरों को लेकर फेड की आलोचना कर रहे हैं और तत्काल कटौती की मांग कर रहे हैं। वहीं, फेड चेयर जेरोम पॉवेल पर कथित कानूनी दबाव की खबरों ने सेंट्रल बैंक की स्वतंत्रता को लेकर बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।

आगे क्या? शेयर बाजार रहेगा अलर्ट मोड पर

फेड की हालिया गाइडेंस के मुताबिक 2026 में सिर्फ एक बार ब्याज दर कटौती की संभावना जताई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई और रोजगार से जुड़े आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए संकेत साफ है कि फेड का रुख फिलहाल सख्त बना रहेगा और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

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