दावोस में भारत ने पूरी ताकत के साथ अपनी बात कही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भेदभाव भरे वर्गीकरण का कड़ा विरोध किया। दरअसल अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने AI इनोवेशन की एक लिस्ट बनाई है जिसमें भारत को सेकेंड ग्रेड AI पावर बताया गया है।
दावोस में वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की बैठक में IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जियोवा ने कहा था कि भारत AI के मामले में अमेरिका और चीन जैसी पहले दर्ज़े की ताक़तों से काफी पीछे है। ये बात वहां मौजूद हमारे IT और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव को बुरी लगी। उन्होंने तुरंत इसका विरोध किया। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि IMF ने पता नहीं किस आधार पर देशों की AI कैटेगरी बनाई है, हकीकत ये है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में भारत पहले दर्ज़े की शक्ति है।
वैष्णव ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ बताया कि भारत ने किस तरह अपनी अर्थव्यवस्था में AI का इस्तेमाल बढ़ाया है, ज्यादा से ज्यादा लोगों को AI इनोवेशन से जोड़ने का काम हो रहा है और AI का इस्तेमाल रोज़मर्रा की जिंदगी को आसान बनाने में किया जा रहा है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत AI के मामले में किसी से कम नहीं है और भारत इस मामले में पहली कतार में खड़ा है।
भारत को एक बार फिर बताना पड़ा कि वो जमाना चला गया जब World Bank और IMF भारत को नीचा दिखाकर निकल जाते थे। अश्विनी वैष्णव ने याद दिलाया कि अब भारत आंख में आंख डालकर बात करता है। उन्होंने बताया कि IMF गलत है और भारत सही है, भारत की AI power क्या है और कैसे AI talent के मामले में भारत दुनिया में नंबर 2 पर है।
मतलब साफ है, ग्रुप बनाने वालों को, रेटिंग देने वालों को भारत के बारे में अब सोच-समझ कर बोलना होगा। (रजत शर्मा)
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